प्रोस्पेक्टस बिक्री घोटाले में अफसर पर एफआईआर दर्ज, 1.11 करोड़ रुपये के गबन का आरोप
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के अंतरराष्ट्रीय दूरवर्ती शिक्षा एवं मुक्त अध्ययन केंद्र (इक्डोल) में प्रोस्पेक्टस बिक्री घोटाले में थाना बालूगंज में शनिवार को एफआईआर दर्ज की है। एचपीयू के कुल सचिव घनश्याम चंद की शिकायत पर यह एफआईआर अनुभाग अधिकारी बाबू राम के खिलाफ दर्ज हुई है। बाबू राम पर आरोप है कि इन्होंने पिछले सात साल में 1.11 करोड़ रुपये का गबन किया है।
ऑडिट में सामने आए मामले के बाद एचपीयू प्रशासन ने बाबू राम को 16 नवंबर को निलंबित कर दिया था। इक्डोल निदेशक की अध्यक्षता में आंतरिक जांच कमेटी गठित की गई थी। जांच रिपोर्ट में बाबू राम को प्रोस्पेक्टस बिक्री की करीब एक करोड़ ग्यारह लाख 67 हजार का गोलमाल करने का दोषी पाया गया। यह गोलमाल सात सालों में अंजाम दिया गया था। इस रिपोर्ट के आधार पर ही अब एफआईआर दर्ज कराई गई है।
शिकायत में कहा गया है कि बाबू राम इक्डोल के प्रोस्पेक्टस काउंटर पर 2011-12 से 2017-18 पर तैनात था। इसी दौरान उसने प्रोस्पेक्टस की सेल में 1,11,67000 का घोटाला किया है। बाबू राम इस सीट पर 2001 से प्रोस्पेक्टस बिक्री का कार्य कर रहा था। इसलिए एचपीयू स्तर पर बनाई गई जांच कमेटी ने 2001 से प्रोस्पेक्टस सेल के रिकॉर्ड की जांच भी की है। कुल सचिव ने पुलिस को दी शिकायत में बाबू राम के उक्त सेल काउंटर पर तैनाती के दिन से 2018 तक के कार्यकाल में हुई बिक्री की जांच करने की मांग भी की है।
ऑडिट में सामने आया था प्रोस्पेक्टस घोटाला
इक्डोल के नवंबर माह में किए गए ऑडिट में प्रोस्पेक्टस बिक्री में घोटाले का मामला सामने आया था। आडिट कर रही एजी की टीम ने ऑडिट पेरा में प्रोस्पेक्टस बिक्री में घोटाले का पैरा बनाकर विवि को लिखित में सूचित किया था। एजी टीम ने गड़बड़ी का पता लगाने को एचपीयू को अपने स्तर पर जांच करने को कहा था।
अब पुलिस जांच में होगा खुलासा
अब पुलिस जांच में सामने आएगा कि इस घोटाले में सिर्फ बाबू राम शामिल था या वह किसी की छत्रछाया में इतनी रकम का गबन कर गया। प्रोस्पेक्टस बिक्री की प्रक्रिया में इसकी छपाई, बिक्री से लेकर आय को बैंक में जमा करवाने तक की प्रक्रिया में बहुत से लोग शामिल होते हैं।
2011 से लेकर कैसे किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। यूनिवर्सिटी का अपना लोक ऑडिट विभाग भी है, जो हर साल ऑडिट करता है। सवाल उठता है कि एलएडी की नजर में यह एक करोड़ का घोटाला क्यों सामने नहीं आया। इन सब सवालों का जवाब पुलिस जांच में सामने आएगा।