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मृतक महिला और दूसरे व्यक्ति के नाम पर हड़प ली रकम
दीपक मेहता, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 20 Oct 2018 10:26 AM IST
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मनरेगा में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवक (जीआरएस) महिला कर्मचारी तीन साल तक एक मृत महिला के खाते से पैसे हड़पती रही। हैरत की बात है कि यह महिला 2015 में मर चुकी थी जबकि जीआरएस कर्मचारी तीन सालों तक मृतका के राष्ट्रीय ग्रामीण विकास प्राधिकरण की वेबसाइट (एमआईएस) खाते से पैसे निकालती रही और इस राशि को अपनी बेटी के खाते में डालती रही। वहीं, दूसरे मामले में जीआरएस ने एमआईएस पर फर्जी खाता डालकर दूसरे व्यक्ति के नाम पर मनरेगा के पैसे हड़प लिए।
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सोशल ऑडिट विभाग ने 2018-19 की सामाजिक अंकेक्षण (मनरेगा) की रिपोर्ट में मंडी जिले के विकास खंड बल्ह की एक पंचायत में मनरेगा में कार्यरत कर्मचारी महिला के खिलाफ दस्तावेजों के साथ अनुचित तरीके से छेड़छाड़ करने का मामला उजागर किया है। सोशल ऑडिट विभाग पिछले तीन साल से इस मामले की जांच कर रहा था लेकिन पंचायत से रिकॉर्ड न मिलने के कारण यह मामला दबा रहा।
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विभाग ने सितंबर में इस मामले में पूरी जांच कर मनरेगा जीआरएस के खिलाफ मनरेगा के विभिन्न कार्याें और मस्टररोल में गड़बड़ियां पाईं। सोशल ऑडिट विभाग के निदेशक डॉ. चांद प्रकाश ने बताया कि मंडी जिले की बल्ह पंचायत में ग्राम रोजगार सेवक की ओेर से दो अलग-अलग मामलों में मनरेगा कार्य में की गई गड़बड़ियों की रिपोर्ट ग्रामीण विकास विभाग को साैंप दी है।
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कैसे सामने आया मामला
सामाजिक अंकेक्षण की अवधि के दौरान सोशल ऑडिट विभाग ने जब इस पंचायत में दस्तावेजों का सत्यापन किया तो मनरेगा के तहत पंचायत के विभिन्न कार्यों पर मस्टररोल जारी किए थे और मस्टररोल को एमआईएस पर ऑनलाइन भी कर दिया है। इसके बाद उक्त बैंक खाते से उस अविधि के दौरान किए गए कार्यों का भुगतान भी हो चुका था। जबकि महिला 2015 में मर चुकी थी। जांच करने पर सामने आया कि मृतक का बैंक में कोई भी खाता नहीं है जबकि मनरेगा वेबसाइट में एमआईएस पर मृतक के खाते में यह पेमेंट हुई है। इसके बाद छानबीन करने के बाद पता चला कि यह पैसा बैंक में जीआरएस की बेटी के खाते में जा रहा है।