भंडारी बन गए आरोपी, बाकी अफसरों को दी क्लीन चिट
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फोन टैपिंग मामले में विजिलेंस ने केवल पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के खिलाफ ही अभियोजन मंजूरी मांगी है।
जांच एजेंसी ने हालांकि अपनी रिपोर्ट में गृह विभाग और सीआईडी के कुछ अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश तो की है, लेकिन इन्हें आरोपी नहीं बनाया है।
अब इन पर कार्रवाई करना या न करना सरकार पर निर्भर करता है। जिस फोन टैपिंग प्रकरण के कारण पुलिस प्रमुख भंडारी को अपने पद से हाथ धोना पड़ा था, उसमें विजिलेंस को हालांकि पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
अवैध टैपिंग के लिए बनाया है आरोपी
विजिलेंस के जांच अधिकारी इस बात को मान रहे हैं कि जांच में कुछ राजनेताओं की बातचीत की रिकॉर्डिंग हाथ आई तो है, लेकिन यह रिकॉर्डिगिं वैध थी या अवैध, यह साबित करने के सबूत नहीं हैं।
ऐसे में विजिलेंस ने ड्राफ्ट चार्जशीट में 6 महीने से पुरानी रिकॉर्डिंग रखने के लिए सीआईडी के पूर्व प्रमुख आईडी भंडारी को मुख्य आरोपी बनाया है।
विजिलेंस ने भंडारी को इंडियन टेलीग्राफ एक्ट की धारा 26 के तहत आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला बनाने की सिफारिश की है। विजिलेंस का दावा है कि जांच के दौरान उन्हें 2009 से 30 जून 2012 के मध्य की कई रिकॉर्डिगिं मिली है।