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Shimla News: चेक बाउंस के मामले में सीएमडी व निदेशक बरी
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एक करोड़ रुपये का चेक हुआ था बाउंस
बिजली बोर्ड ने नोटिस के बाद दायर किया था केस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत ने एक करोड़ रुपये के चेक बाउंस के एक मामले में हरियाणा की एक कंपनी जीएनजी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी और निदेशक को बरी कर दिया है।
अदालत ने माना कि कंपनी को आरोपी बनाए बिना केवल अधिकारियों पर मुकदमा चलाना और चेक काटने वाले को कानूनी नोटिस न देना कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है। मामले के अनुसार हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड ने आरोपी कंपनी के साथ विभिन्न लोक मित्र केंद्रों के जरिये बिजली बिल एकत्र करने का करार किया था।
बिलों की राशि बोर्ड के खाते में जमा न कराने पर देनदारी चुकाने के लिए कंपनी की ओर से 50-50 लाख रुपये के दो चेक जारी किए थे। बैंक में प्रस्तुत करने पर दोनों चेक बाउंस हो गए थे। राशि का भुगतान न होने पर बिजली बोर्ड ने अदालत में धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एनआई एक्ट की धारा 141 के तहत कंपनी को पक्षकार बनाना अनिवार्य है। इसके अलावा चेक सीएमडी द्वारा हस्ताक्षरित थे जबकि कानूनी नोटिस केवल निदेशक को भेजा था। अदालत ने इन कानूनी खामियों के आधार पर शिकायत खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को बरी करने के आदेश जारी किए। संवाद
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बिजली बोर्ड ने नोटिस के बाद दायर किया था केस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत ने एक करोड़ रुपये के चेक बाउंस के एक मामले में हरियाणा की एक कंपनी जीएनजी ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीएमडी और निदेशक को बरी कर दिया है।
अदालत ने माना कि कंपनी को आरोपी बनाए बिना केवल अधिकारियों पर मुकदमा चलाना और चेक काटने वाले को कानूनी नोटिस न देना कानूनी दृष्टि से उचित नहीं है। मामले के अनुसार हिमाचल राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड ने आरोपी कंपनी के साथ विभिन्न लोक मित्र केंद्रों के जरिये बिजली बिल एकत्र करने का करार किया था।
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बिलों की राशि बोर्ड के खाते में जमा न कराने पर देनदारी चुकाने के लिए कंपनी की ओर से 50-50 लाख रुपये के दो चेक जारी किए थे। बैंक में प्रस्तुत करने पर दोनों चेक बाउंस हो गए थे। राशि का भुगतान न होने पर बिजली बोर्ड ने अदालत में धारा 138 के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एनआई एक्ट की धारा 141 के तहत कंपनी को पक्षकार बनाना अनिवार्य है। इसके अलावा चेक सीएमडी द्वारा हस्ताक्षरित थे जबकि कानूनी नोटिस केवल निदेशक को भेजा था। अदालत ने इन कानूनी खामियों के आधार पर शिकायत खारिज करते हुए दोनों आरोपियों को बरी करने के आदेश जारी किए। संवाद
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