Shimla News: मुख्यमंत्री सुखविंद्र सुक्खू ने बिजली बोर्ड कर्मियों को वार्ता के लिए बुलाया
गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ कर्मचारी यूनियनों की बैठक होगी। मुख्यमंत्री ने बोर्ड के कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाया है।
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हिमाचल बिजली बोर्ड में पुरानी पेंशन बहाल करने और प्रबंध निदेशक को पद से हटाने की मांग को लेकर वीरवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के साथ कर्मचारी यूनियनों की बैठक होगी। मुख्यमंत्री ने बोर्ड के कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त संघर्ष समिति को वार्ता के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद ही समिति ने 11 जनवरी को प्रदर्शन टालने का फैसला लिया था। वीरवार की बैठक में समिति की ओर से सिर्फ मांगों को ही मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जाएगा। बिजली बोर्ड के कर्मचारियों ने बीते दिनों एक सप्ताह तक मुख्यालय कुमार हाउस के बाहर भोजन अवकाश के दौरान मांगों को लेकर रोजाना प्रदर्शन किया। बोर्ड में 1 जनवरी को वेतन और पेंशन जारी होने कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू किया था। करीब चार दिन वेतन और पेंशन की अदायगी होने के बाद कर्मियों ने ओपीएस बहाली और प्रबंध निदेशक को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी रखा। 11 जनवरी को कुमार हाउस में हुए राज्य स्तरीय प्रदर्शन के बोर्ड के कर्मचारियों और अभियंताओं ने प्रतिमाह घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली 125 यूनिट की निशुल्क बिजली को लेने से इनकार कर दिया।
बिजली बोर्ड की कमजोर होती वित्तीय हालत सुधारने के लिए यह एलान किया गया। बोर्ड के कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक इंजीनियर लोकेश ठाकुर और सह संयोजक हीरालाल वर्मा का कहना है कि नया वित्त वर्ष शुरू होने वाला है। ऐसे में अगर जल्द ही बोर्ड में पुरानी पेंशन बहाल नहीं हुई तो कर्मचारियों को इसका नुकसान उठाया पड़ेगा। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद अफसरशाही ओपीएस बहाली में आनाकानी कर रही है। इस मामले को वीरवार को होने वाली बैठक में मुख्य तौर पर उठाया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड को स्थायी प्रबंध निदेशक देने की मांग की भी जाएगी। वर्तमान प्रबंध निदेशक के पास बोर्ड का अतिरिक्त कार्यभार है। बोर्ड के अलावा प्रबंध निदेशक के पास ऊर्जा विभाग और पॉवर कारपोरेशन का जिम्मा भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार मामले की गंभीरता को समझेगी और इस बैठक के परिणाम अवश्य सकारात्मक निकलेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पुरानी पेंशन की बहाली नहीं होती है और स्थायी प्रबंध निदेशक नहीं मिलता है तो आंदोलन को फिर शुरू किया जाएगा।