सीएम जयराम ने अध्यापकों को पढ़ाया समय पर आने का पाठ, कही ये बड़ी बात
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि अगर सभी शिक्षक अनुशासन में रहते तो स्कूलों में बायोमीट्रिक और सीसीटीवी कैमरे लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। शिक्षक दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिक्षकों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि संस्कारों के पीछे छूटने पर ही सरकारों को नियम और कानून कड़े करने पड़ते हैं।
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मुख्यमंत्री ने पूर्व के वर्षों को याद करते हुए कहा कि हमें स्कूलों में पढ़ाया गया कि नकल करना पाप है लेकिन अब नकल रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर स्कूलों में कैमरे लगाने पड़ रहे हैं। पहले शिक्षक अनुशासन के पाबंद थे। अब शिक्षकों की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक मशीनें लगानी पड़ रही हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलती परिस्थितियां चिंतनीय हैं। सभी को इस पर विचार करना होगा। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से उनकी इस बात को अन्यथा न लेने की अपील करते हुए कहा कि कुछ चीजें परेशान करती हैं, इसलिए यह कहना जरूरी भी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों का निरीक्षण करने के लिए मोबाइल ऐप बनाने पड़ रहे हैं।
इससे जीपीएस के माध्यम से लोकेशन का पता चल जाता है कि शिक्षक ने स्कूल में जाकर निरीक्षण किया है कि नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों पर नजर रखने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। शायद इसे ही कलयुग कहा जाएगा। उन्होंने शिक्षकों से अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने की अपील करते हुए विद्यार्थियों के हित में कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
हिमाचल के लोगों के प्यार को कभी नहीं भूल पाऊंगा : राज्यपाल
राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि हिमाचल के लोग बहुत ही अच्छे हैं। इनके प्यार को मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। उन्होंने कहा कि 22 जुलाई को प्रदेश के राज्यपाल की शपथ ली थी, अब राजस्थान जाना है।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल बनने से पहले मैं हिमाचल में भाजपा का प्रभारी भी रह चुका हूं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के व्यवहार और आचरण का विद्यार्थी पालन करते हैं।
ऐसे में शिक्षकों का कर्तव्य बनता है कि वे अच्छा आचरण करे। शिक्षकों द्वारा दी गई शिक्षा से बच्चों में आत्मविश्वास पैदा होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों के बीच परस्पर संबंध होना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ खेल औैर सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बढ़ावा देना चाहिए।