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Shimla News: लीनियर एक्सीलरेटर मशीन से शुरू होगा कैंसर रोगियों का उपचार
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अंतिम चरण में पहुंचा मशीन का ट्रायल, बीम रेडिएशन से कैंसर प्रभावित हिस्से को सटीक रूप से किया जा सकेगा नष्ट
स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मिलेगी मदद
चंडीगढ़ और एम्स जाने की अब नहीं पड़ेगी जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर केंद्र में कैंसर कोशिकाओं के उपचार के लिए लगाई लीनियर एक्सीलरेटर मशीन का ट्रायल अंतिम चरण में पहुंच गया है।
ट्रायल पूरा होने के बाद मशीन का शुभारंभ किया जाएगा। इसके शुरू होने से कैंसर मरीजों को अस्पताल में ही आधुनिक रेडिएशन या रेडिएशन उपचार की सुविधा मिल सकेगी। मशीन का ट्रायल विशेषज्ञ टीम की देखरेख में किया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से विशेष टीम गठित की है। ट्रायल के तहत कुछ कैंसर मरीजों पर उपचार प्रक्रिया की जा रही है। विभाग के अनुसार अब तक किए गए ट्रायल सफल रहे हैं। लीनियर एक्सीलरेटर मशीन से एक्सटर्नल बीम रेडिएशन के जरिये कैंसर प्रभावित हिस्से को सटीक रूप से उपचारित किया जाता है। इससे आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं पर रेडिएशन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। अभी तक प्रदेश के मरीजों को इस तरह के उपचार के लिए एम्स और पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। मशीन शुरू होने के बाद गंभीर कैंसर मरीजों को उपचार के लिए बाहर जाने की परेशानी कम होगी। विभाग के अनुसार प्रदेश में बीम रेडिएशन से उपचार उपलब्ध करवाने वाली यह पहली मशीन होगी। अब तक कैंसर मरीजों का उपचार विभिन्न थेरेपी के माध्यम से किया जाता रहा है, जिनका प्रभाव स्वस्थ कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है। नई मशीन से उपचार अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।
ऐसे काम करती है मशीन
लीनियर एक्सीलरेटर मशीन उच्च ऊर्जा वाली एक्सरे या इलेक्ट्रॉन बीम उत्पन्न करती है। इन बीम को शरीर में मौजूद ट्यूमर या कैंसर कोशिकाओं पर सटीक रूप से केंद्रित किया जाता है। इससे कैंसर प्रभावित हिस्से को रेडिएशन देकर उपचारित करने में मदद मिलती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान कम करने का प्रयास किया जाता है। विभाग में करोड़ों रुपये की लागत से यह मशीन स्थापित की है।
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कोट
लीनियर एक्सीलरेटर मशीन का ट्रायल चल रहा है और यह लगभग अंतिम चरण में है। ट्रायल पूरा होने के बाद मशीन का शुभारंभ करवाया जाएगा। इससे कैंसर मरीजों को उपचार में काफी सुविधा मिलेगी।
-डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टर्शरी कैंसर अस्पताल
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स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मिलेगी मदद
चंडीगढ़ और एम्स जाने की अब नहीं पड़ेगी जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के टर्शरी कैंसर केंद्र में कैंसर कोशिकाओं के उपचार के लिए लगाई लीनियर एक्सीलरेटर मशीन का ट्रायल अंतिम चरण में पहुंच गया है।
ट्रायल पूरा होने के बाद मशीन का शुभारंभ किया जाएगा। इसके शुरू होने से कैंसर मरीजों को अस्पताल में ही आधुनिक रेडिएशन या रेडिएशन उपचार की सुविधा मिल सकेगी। मशीन का ट्रायल विशेषज्ञ टीम की देखरेख में किया जा रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से विशेष टीम गठित की है। ट्रायल के तहत कुछ कैंसर मरीजों पर उपचार प्रक्रिया की जा रही है। विभाग के अनुसार अब तक किए गए ट्रायल सफल रहे हैं। लीनियर एक्सीलरेटर मशीन से एक्सटर्नल बीम रेडिएशन के जरिये कैंसर प्रभावित हिस्से को सटीक रूप से उपचारित किया जाता है। इससे आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं पर रेडिएशन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। अभी तक प्रदेश के मरीजों को इस तरह के उपचार के लिए एम्स और पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। मशीन शुरू होने के बाद गंभीर कैंसर मरीजों को उपचार के लिए बाहर जाने की परेशानी कम होगी। विभाग के अनुसार प्रदेश में बीम रेडिएशन से उपचार उपलब्ध करवाने वाली यह पहली मशीन होगी। अब तक कैंसर मरीजों का उपचार विभिन्न थेरेपी के माध्यम से किया जाता रहा है, जिनका प्रभाव स्वस्थ कोशिकाओं पर भी पड़ सकता है। नई मशीन से उपचार अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।
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ऐसे काम करती है मशीन
लीनियर एक्सीलरेटर मशीन उच्च ऊर्जा वाली एक्सरे या इलेक्ट्रॉन बीम उत्पन्न करती है। इन बीम को शरीर में मौजूद ट्यूमर या कैंसर कोशिकाओं पर सटीक रूप से केंद्रित किया जाता है। इससे कैंसर प्रभावित हिस्से को रेडिएशन देकर उपचारित करने में मदद मिलती है और आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान कम करने का प्रयास किया जाता है। विभाग में करोड़ों रुपये की लागत से यह मशीन स्थापित की है।
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लीनियर एक्सीलरेटर मशीन का ट्रायल चल रहा है और यह लगभग अंतिम चरण में है। ट्रायल पूरा होने के बाद मशीन का शुभारंभ करवाया जाएगा। इससे कैंसर मरीजों को उपचार में काफी सुविधा मिलेगी।
-डॉ. मनीष गुप्ता, विभागाध्यक्ष, टर्शरी कैंसर अस्पताल