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Shimla News: स्टीयरिंग हो या प्रदेश की सुरक्षा, नारी हर जिम्मेदारी में आगे
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महिला समानता दिवस विशेष.
सामाजिक कुरीतियों की दीवारें तोड़ थामा स्टेयरिंग, सरपट दौड़ा रही हैं बड़े वाहन, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कमाया नाम
पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही महिलाएं
दीक्षा सरोय
शिमला। बदलते समय के साथ अब बेटियों ने सामाजिक कुरीतियों की दीवारें तोड़ दी हैं। पहाड़ों की रानी में अब बस का स्टीयरिंग हो, कूड़ा गाड़ी हो, अस्पताल का कक्ष हो या अपना कारोबार, हर जगह महिलाएं मोर्चा संभाले हुए हैं।
महिला समानता दिवस 26 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस दिवस को महिलाएं सार्थक भी कर रही हैं। महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। शहर में महिला बस चालक और नगर निगम की कूड़ा गाड़ी चलाने वाली महिलाएं सुबह से शाम तक ड्यूटी पर तैनात रहती हैं। तंग और भीड़ भरी ढलानों पर गाड़ी दौड़ाना आसान नहीं है, लेकिन महिलाएं पूरी कुशलता के साथ यह जिम्मेदारी निभा रही हैं। शहर के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में तैनात महिला क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपा राठौर रोजाना 20 से 30 लोगों को काउंसिलिंग दे रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, पाइन नीडल उत्पाद निर्माण, टोपी और स्वेटर बुनाई कर हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं।
परिचर्चा
मेहनत से हर मुकाम कर सकते हैं हासिल : डॉ. दीपा
डीडीयू अस्पताल में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपा बताती हैं कि वह 13-14 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही हैं। मनोविज्ञान की ओर उनका रुझान माता-पिता के मार्गदर्शन से हुआ। बाद में कॉलेज प्रोफेसर की प्रेरणा से यह विषय उनका पैशन बन गया। यह पेशा उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जुनून है। महिलाएं अगर मेहनत और जुनून के साथ प्रयास करें तो कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
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अपनी काबिलियत पर रखें भरोसा : मेहर
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेहर पंवार ने बताया कि वह वर्ष 2022 बैच की भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं और हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले कुछ समय से शिमला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी) के पद पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद पर और अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें। महिलाएं कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं। वह पुलिस और सेना सहित किसी भी क्षेत्र में कार्य कर सकती हैं।
बच्चियों को काबिल बनाना ही मेरा लक्ष्य : शीतल
मिडिल बाजार की कारोबारी शीतल जैन ने बताया कि वह दस साल से कपड़ों का कारोबार कर रही हैं। कुछ समय पहले उनके पति की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अपनी दोनों बेटियों के पालन-पोषण के लिए उन्होंने पहले बैग में कपड़े बेचने शुरू किए। इसके बाद उन्होंने अपनी दुकान खोली। अपनी बच्चियों को काबिल बनाना ही उनका लक्ष्य है। महिलाएं अगर चाहें तो छोटे-से-छोटे और बड़े-से-बड़े कारोबार को कर सकती हैं।
हर कार्य कर सकती हैं महिलाएं : प्रिया
नगर निगम में पहली महिला गार्बेज वाहन चालक प्रिया शर्मा ने बताया कि वह शिमला ग्रामीण के चनावग गांव की रहने वाली है। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर कार्य कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वाहन चलाने के लिए उन्हें ससुर और परिवार ने प्रोत्साहित किया। वर्तमान में वह ओल्ड बस स्टैंड, आईजीएमसी और लक्कड़ बाजार रूट पर नगर निगम का वाहन चला रही हैं। आज के समय में महिलाएं न सिर्फ स्कूटी, बल्कि बस, ट्रक सहित हर प्रकार के वाहन चला रही हैं।
दूसरी महिलाओं को भी बनाएं सशक्त : सुनीता
नेहरा पंचायत के घनयोग गांव की सुनीता बंसल ने बताया कि उन्होंने पहले घर में कपड़े सिलने का काम शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे डिजाइनर और पारंपरिक कपड़ों की सिलाई को पेशा बनाया और स्वरोजगार शुरू किया। आज वह ग्रामीण महिलाओं को सिलाई का हुनर सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को पहले खुद सशक्त होना चाहिए और फिर दूसरी महिलाओं को भी सशक्त बनाना चाहिए।
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सामाजिक कुरीतियों की दीवारें तोड़ थामा स्टेयरिंग, सरपट दौड़ा रही हैं बड़े वाहन, स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कमाया नाम
पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही महिलाएं
दीक्षा सरोय
शिमला। बदलते समय के साथ अब बेटियों ने सामाजिक कुरीतियों की दीवारें तोड़ दी हैं। पहाड़ों की रानी में अब बस का स्टीयरिंग हो, कूड़ा गाड़ी हो, अस्पताल का कक्ष हो या अपना कारोबार, हर जगह महिलाएं मोर्चा संभाले हुए हैं।
महिला समानता दिवस 26 अगस्त को मनाया जा रहा है। इस दिवस को महिलाएं सार्थक भी कर रही हैं। महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। शहर में महिला बस चालक और नगर निगम की कूड़ा गाड़ी चलाने वाली महिलाएं सुबह से शाम तक ड्यूटी पर तैनात रहती हैं। तंग और भीड़ भरी ढलानों पर गाड़ी दौड़ाना आसान नहीं है, लेकिन महिलाएं पूरी कुशलता के साथ यह जिम्मेदारी निभा रही हैं। शहर के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में तैनात महिला क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपा राठौर रोजाना 20 से 30 लोगों को काउंसिलिंग दे रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, पाइन नीडल उत्पाद निर्माण, टोपी और स्वेटर बुनाई कर हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं।
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मेहनत से हर मुकाम कर सकते हैं हासिल : डॉ. दीपा
डीडीयू अस्पताल में तैनात क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपा बताती हैं कि वह 13-14 वर्षों से मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रही हैं। मनोविज्ञान की ओर उनका रुझान माता-पिता के मार्गदर्शन से हुआ। बाद में कॉलेज प्रोफेसर की प्रेरणा से यह विषय उनका पैशन बन गया। यह पेशा उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जुनून है। महिलाएं अगर मेहनत और जुनून के साथ प्रयास करें तो कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।
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अपनी काबिलियत पर रखें भरोसा : मेहर
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मेहर पंवार ने बताया कि वह वर्ष 2022 बैच की भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी हैं और हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले कुछ समय से शिमला में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहरी) के पद पर तैनात हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं खुद पर और अपनी काबिलियत पर भरोसा रखें। महिलाएं कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं। वह पुलिस और सेना सहित किसी भी क्षेत्र में कार्य कर सकती हैं।
बच्चियों को काबिल बनाना ही मेरा लक्ष्य : शीतल
मिडिल बाजार की कारोबारी शीतल जैन ने बताया कि वह दस साल से कपड़ों का कारोबार कर रही हैं। कुछ समय पहले उनके पति की मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अपनी दोनों बेटियों के पालन-पोषण के लिए उन्होंने पहले बैग में कपड़े बेचने शुरू किए। इसके बाद उन्होंने अपनी दुकान खोली। अपनी बच्चियों को काबिल बनाना ही उनका लक्ष्य है। महिलाएं अगर चाहें तो छोटे-से-छोटे और बड़े-से-बड़े कारोबार को कर सकती हैं।
हर कार्य कर सकती हैं महिलाएं : प्रिया
नगर निगम में पहली महिला गार्बेज वाहन चालक प्रिया शर्मा ने बताया कि वह शिमला ग्रामीण के चनावग गांव की रहने वाली है। उन्होंने कहा कि महिलाएं हर कार्य कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि वाहन चलाने के लिए उन्हें ससुर और परिवार ने प्रोत्साहित किया। वर्तमान में वह ओल्ड बस स्टैंड, आईजीएमसी और लक्कड़ बाजार रूट पर नगर निगम का वाहन चला रही हैं। आज के समय में महिलाएं न सिर्फ स्कूटी, बल्कि बस, ट्रक सहित हर प्रकार के वाहन चला रही हैं।
दूसरी महिलाओं को भी बनाएं सशक्त : सुनीता
नेहरा पंचायत के घनयोग गांव की सुनीता बंसल ने बताया कि उन्होंने पहले घर में कपड़े सिलने का काम शुरू किया था। इसके बाद धीरे-धीरे डिजाइनर और पारंपरिक कपड़ों की सिलाई को पेशा बनाया और स्वरोजगार शुरू किया। आज वह ग्रामीण महिलाओं को सिलाई का हुनर सिखा रही हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं को पहले खुद सशक्त होना चाहिए और फिर दूसरी महिलाओं को भी सशक्त बनाना चाहिए।