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एचपीयू में शिक्षकों पर निगरानी की व्यवस्था से भड़का हपुटवा
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विवि में की नई व्यवस्था को बताया शिक्षकों का अपमान, बोले, एक जगह नहीं बैठ सकते हैं शिक्षक : ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल विश्वविद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए की गई निगरानी व्यवस्था पर शिक्षकों का एक गुट भड़क गया है। विभागों में शिक्षक मौजूद हैं या नहीं, इसका पूरा ब्योरा सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से जुटाने की व्यवस्था की है। इसके विरोध में उतरे हिमाचल प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रो. डीआर ठाकुर ने कहा कि यह सीधे तौर पर शिक्षकों का अपमान है। कहा कि सुरक्षा कर्मियों से शिक्षकों के विभाग में होने न होने की निगरानी करवाने से शिक्षकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक कोई बंधुआ मजदूर नहीं जो सुरक्षा गार्ड उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। शिक्षकों को समाज में एक गरिमामय और आदर का दर्जा दिया गया है। कहा कि कुलपति यह न भूलें कि वह खुद भी एक शिक्षक हैं। शिक्षक होने पर ही वह कुलपति बने हैं। विवि शिक्षा का एक सर्वोच्च स्थान होता है जहां शिक्षकों को एकेडमिक फ्रीडम होती है और शिक्षक केवल अपने कक्ष तक ही सीमित नहीं होता क्योंकि वह शिक्षा तथा अनुसंधान के नाते प्रयोगशालाओं में भी जाता है। नई खोजों को जानने के लिए पुस्तकालय में भी भ्रमण करता है और यही नहीं वह अध्ययन तथा अनुसंधान के लिए बाहर फील्ड में भी जाता है। दूसरे विभागों और शिक्षकों के साथ ज्वाइंट वह कोलैबोरेटिव अनुसंधान भी करता है। हमेशा ही अपने कक्ष में शिक्षक नहीं बैठ सकता। ऐसे में निगरानी की यह व्यवस्था गुरु शब्द का अपमान है।
कोविड महामारी के कारण ज्यादा से ज्यादा लोगों को घरों से काम करने की सलाह दी जा रही है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसके विपरीत शिक्षकों को कक्ष में बिठाने का प्रयास कर रहा है। विवि प्रशासन को गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे पठन-पाठन के लिए उचित सामग्री प्रदान की जा सकेगी तथा अनुसंधान के लिए उचित प्रोग्राम विकसित होगा। हपुट्वा ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दें और शिक्षकों की गरिमा को बनाए रखें।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल विश्वविद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए की गई निगरानी व्यवस्था पर शिक्षकों का एक गुट भड़क गया है। विभागों में शिक्षक मौजूद हैं या नहीं, इसका पूरा ब्योरा सुरक्षा कर्मियों के माध्यम से जुटाने की व्यवस्था की है। इसके विरोध में उतरे हिमाचल प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रो. डीआर ठाकुर ने कहा कि यह सीधे तौर पर शिक्षकों का अपमान है। कहा कि सुरक्षा कर्मियों से शिक्षकों के विभाग में होने न होने की निगरानी करवाने से शिक्षकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंची है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक कोई बंधुआ मजदूर नहीं जो सुरक्षा गार्ड उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। शिक्षकों को समाज में एक गरिमामय और आदर का दर्जा दिया गया है। कहा कि कुलपति यह न भूलें कि वह खुद भी एक शिक्षक हैं। शिक्षक होने पर ही वह कुलपति बने हैं। विवि शिक्षा का एक सर्वोच्च स्थान होता है जहां शिक्षकों को एकेडमिक फ्रीडम होती है और शिक्षक केवल अपने कक्ष तक ही सीमित नहीं होता क्योंकि वह शिक्षा तथा अनुसंधान के नाते प्रयोगशालाओं में भी जाता है। नई खोजों को जानने के लिए पुस्तकालय में भी भ्रमण करता है और यही नहीं वह अध्ययन तथा अनुसंधान के लिए बाहर फील्ड में भी जाता है। दूसरे विभागों और शिक्षकों के साथ ज्वाइंट वह कोलैबोरेटिव अनुसंधान भी करता है। हमेशा ही अपने कक्ष में शिक्षक नहीं बैठ सकता। ऐसे में निगरानी की यह व्यवस्था गुरु शब्द का अपमान है।
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कोविड महामारी के कारण ज्यादा से ज्यादा लोगों को घरों से काम करने की सलाह दी जा रही है लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन इसके विपरीत शिक्षकों को कक्ष में बिठाने का प्रयास कर रहा है। विवि प्रशासन को गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इससे पठन-पाठन के लिए उचित सामग्री प्रदान की जा सकेगी तथा अनुसंधान के लिए उचित प्रोग्राम विकसित होगा। हपुट्वा ने प्रशासन से मांग की है कि इस तरह की गतिविधियों को तुरंत प्रभाव से बंद कर दें और शिक्षकों की गरिमा को बनाए रखें।
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