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हिमाचल प्रदेश: लंबित डीए पर हाईकोर्ट सख्त, छह सप्ताह में फैसला कर एरियर देने के निर्देश

Thu, 10 Sep 2026 06:13 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 10 Sep 2026 06:13 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से एक जुलाई 2022 से लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तों और बकाये के भुगतान को लेकर दायर आठ याचिकाओं का एक साथ निपटारा कर दिया है। 

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Himachal High Court takes a strict stance on pending DA; directs a decision to be made and arrears paid within
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की ओर से एक जुलाई 2022 से लंबित महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तों और बकाये के भुगतान को लेकर दायर आठ याचिकाओं का एक साथ निपटारा कर दिया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर कानून और सरकारी ज्ञापनों के तहत 6 सप्ताह के भीतर फैसला लें और बकाया का भुगतान करें। इसके अलावा विभाग की ओर से लिए गए निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ताओं को दी जाए। यदि याचिकाकर्ता दावों के अनुसार पात्र पाए जाते हैं, तो उनके डीए की किस्तों और एरियर का भुगतान भी इसी निर्धारित अवधि (6 सप्ताह) के भीतर कर दिया जाए।

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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि सरकार की ओर से जारी 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 के विभिन्न कार्यालय ज्ञापनों के तहत वे 1 जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते के बकाये के हकदार हैं, लेकिन उन्हें अभी तक यह राशि जारी नहीं की गई है। तर्क दिया कि सरकार की अधिसूचनाओं (10 अक्तूबर 2024 और 3 मार्च 2026) के माध्यम से राज्य सरकार के कर्मचारियों की एक विशेष श्रेणी को देय तिथियों से केंद्र सरकार की दरों पर महंगाई भत्ता दिया गया है, जबकि उनके साथ भेदभाव हो रहा है। अदालत ने पाया कि कर्मचारियों ने इस संबंध में 18 मई 2026 को सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपने अभ्यावेदन सौंपे थे, जो अभी तक लंबित हैं। अदालत ने गुण-दोष पर विचार किए बिना राज्य सरकार और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि कर्मचारियों की लंबित 5 किस्तों और एक जुलाई 2022 से देय डीए बकाए की मांग से जुड़ी अर्जियों पर 6 सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लिया जाए। अदालत ने यह आदेश संदीप कुमार और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर दिया।

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भरमौर में एकलव्य मॉडल स्कूल का रास्ता साफ: हाईकोर्ट में सुनवाई बंद
प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा जिले के भरमौर (होली) में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल के निर्माण और उससे जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद दाखिल जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट को देखने के बाद कहा कि अब इस मामले की अलग से निगरानी करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि स्कूल और हॉस्टल के निर्माण का काम सही तरीके से आगे बढ़ रहा है। सरकार की ओर से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट पर संतोष व्यक्त करते हुए इस याचिका को बंद करने का आदेश जारी किया। अदालत को सूचित किया गया कि नए मानकों के तहत स्कूल निर्माण के लिए न्यूनतम आवश्यक भूमि का क्षेत्रफल घटाकर 8 एकड़ कर दिया गया है।

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अब कम से कम 8 एकड़ जमीन का पैमाना तय
पहले नियम के मुताबिक स्कूल के लिए ज्यादा जमीन चाहिए थी, लेकिन सरकार ने नियमों में बदलाव कर अब कम से कम 8 एकड़ जमीन का पैमाना तय कर दिया है। होली में कुल 8.75 एकड़ जमीन में से 5.622 एकड़ जमीन जनजातीय विकास विभाग के नाम भी ट्रांसफर की जा चुकी है। बाकी बची जमीन भी जल्द ट्रांसफर कर दी जाएगी। खेल विभाग के पर्वतारोहण संस्थान के पास लड़कों के लिए 10 कमरों का हॉस्टल बनाया जा रहा है। दो माह में यह बनकर तैयार हो जाएगा। अदालत ने माना कि इस याचिका का मुख्य मकसद जनजातीय बच्चों के लिए स्कूल और बुनियादी सुविधाएं उलब्ध करवाना था। अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि बच्चों के फायदे के लिए जो भी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, उनका काम समय पर पूरा किया जाए।

प्रधान सचिव विधि बाली की सेवाएं वापस लीं, हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार पद पर तैनाती
 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रशासनिक हित को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश न्यायिक सेवा (जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैडर) के अधिकारी राजीव बाली की सेवाएं राज्य सरकार से वापस ले ली गई हैं। राजीव बाली वर्तमान में हिमाचल प्रदेश सरकार में एलआर-कम-प्रधान सचिव (विधि) के पद पर तैनात थे। जारी आदेश के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से हाईकोर्ट में रजिस्ट्रार के पद पर तैनात किया गया है। यह आदेश हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। संवाद

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