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शहर में अब पहली बार निगम पार्षद भी काट सकेंगे चालान
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के सार्वजनिक शौचालयों में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए अब नगर निगम के पार्षद भी औचक निरीक्षण कर चालान काट सकेंगे। नगर निगम में पहली बार पार्षदों को चालान काटने की शक्तियां दी जा रही हैं।
इसी महीने से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। अपने वार्ड के सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी पाए जाने पर स्थानीय पार्षद एक हजार रुपये तक का चालान काट सकेंगे। यदि शौचालय संचालक चालान नहीं भरता है तो उसे सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनेल्टी भी लगाई जाएगी। नगर निगम शहर के 119 शौचालयों की सफाई व्यवस्था दूसरी संस्था को देने जा रहा है। इसके टेंडर 13 मार्च को खुलने हैं। टेंडर में यह शर्त लगाई है कि पार्षद कभी भी औचक निरीक्षण कर सकते हैं। ऐसे में हर समय शौचालयों को साफ रखना जरूरी है। पिछले साल ही निगम की मासिक बैठक में यह फैसला लिया गया था।
अब तक लोकप्रिय संस्था कर रही थी संचालन
शहर में अब तक लोकप्रिय संस्था शौचालयों में सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही थी। लेकिन संस्था के खिलाफ काफी शिकायतें आने लगी थीं। पार्षदों का कहना था कि कई कर्मचारी शौचालय साफ नहीं कर रहे हैं। पार्षदों के कहने पर भी यह व्यवस्था नहीं सुधार रहे। इसके बाद पार्षदों को ऐसी शक्तियां देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। साथ ही शौचालय की संचालन व्यवस्था दूसरी संस्था को दी जा रही है।
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व्यवस्था सुधारने में मिलेगी मदद
सदन ने यह प्रस्ताव पारित किया था। पार्षद अपने वार्ड के सार्वजनिक शौचालय का कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। गंदगी पाए जाने पर चालान भी कर सकते हैं। इससे व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी।
-पंकज राय, नगर निगम आयुक्त
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शिमला। शहर के सार्वजनिक शौचालयों में सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए अब नगर निगम के पार्षद भी औचक निरीक्षण कर चालान काट सकेंगे। नगर निगम में पहली बार पार्षदों को चालान काटने की शक्तियां दी जा रही हैं।
इसी महीने से नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी चल रही है। अपने वार्ड के सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी पाए जाने पर स्थानीय पार्षद एक हजार रुपये तक का चालान काट सकेंगे। यदि शौचालय संचालक चालान नहीं भरता है तो उसे सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनेल्टी भी लगाई जाएगी। नगर निगम शहर के 119 शौचालयों की सफाई व्यवस्था दूसरी संस्था को देने जा रहा है। इसके टेंडर 13 मार्च को खुलने हैं। टेंडर में यह शर्त लगाई है कि पार्षद कभी भी औचक निरीक्षण कर सकते हैं। ऐसे में हर समय शौचालयों को साफ रखना जरूरी है। पिछले साल ही निगम की मासिक बैठक में यह फैसला लिया गया था।
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अब तक लोकप्रिय संस्था कर रही थी संचालन
शहर में अब तक लोकप्रिय संस्था शौचालयों में सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभाल रही थी। लेकिन संस्था के खिलाफ काफी शिकायतें आने लगी थीं। पार्षदों का कहना था कि कई कर्मचारी शौचालय साफ नहीं कर रहे हैं। पार्षदों के कहने पर भी यह व्यवस्था नहीं सुधार रहे। इसके बाद पार्षदों को ऐसी शक्तियां देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। साथ ही शौचालय की संचालन व्यवस्था दूसरी संस्था को दी जा रही है।
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व्यवस्था सुधारने में मिलेगी मदद
सदन ने यह प्रस्ताव पारित किया था। पार्षद अपने वार्ड के सार्वजनिक शौचालय का कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। गंदगी पाए जाने पर चालान भी कर सकते हैं। इससे व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी।
-पंकज राय, नगर निगम आयुक्त