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Shimla News: घरेलू हिंसा की शिकार पत्नी और बच्चों को मिलेंगे 8 हजार मासिक

Thu, 04 Jun 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 04 Jun 2026 11:59 PM IST
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8,000 per month to the wife and children of victims of domestic violence
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुनाया फैसला
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पति को 10 हजार रुपये जुर्माना देने का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला प्रतिभा नेगी की अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में पीड़िता और उनके दो नाबालिग बच्चों के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति शक्ति सिंह को 8000 रुपये प्रति माह पीड़िता और बच्चों के लिए भरण-पोषण भत्ता देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के एवज में पति को 10,000 रुपये को एकमुश्त मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं।

टुटू शिमला के रिहाई गांव की रहने वाली पीड़िता की शादी शक्ति सिंह के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति शराब के नशे में उसके साथ मारपीट करता था। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उनका पति अपनी पूरी कमाई शराब में उड़ा देता था और परिवार को एक रुपया तक नहीं देता था। हद तो तब हुई जब आरोपी पति अपनी पत्नी, बच्चों और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर एक अन्य महिला के साथ रहने लगा। सुनवाई के दौरान आरोपी पति ने खुद को बेरोजगार बताते हुए दावा किया था कि वह दिहाड़ी-मजदूरी से केवल 5000 रुपये महीना कमाता है। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि कानून साधन का मतलब सिर्फ संपत्ति या वर्तमान नौकरी नहीं, बल्कि कमाने की क्षमता से है। प्रदेश में एक अकुशल मजदूर की न्यूनतम दिहाड़ी भी 425 रुपये (यानी 12,750 प्रति माह) है। ऐसे में एक स्वस्थ और सक्षम व्यक्ति कमाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने के नैतिक और कानूनी कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता। कोर्ट ने 8,000 रुपये मासिक भत्ता तय किया है जिसमें से 4000 रुपये पीड़िता को, 2000 रुपये बेटी को शादी होने तक और 2000 रुपये बेटे को बालिग होने तक हर महीने देने होंगे। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पति पीड़िता या बच्चों के साथ मारपीट नहीं करेगा। साथ ही यदि पीड़िता अपने साझा घर में रहना चाहती है, तो पति उसे वहां से बेदखल नहीं कर सकता और न ही उसे रहने में कोई बाधा डालेगा।
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