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चार माह से अमृत स्टोर में नहीं इंप्लांटस

Tue, 12 Dec 2017 10:38 PM IST
Updated Tue, 12 Dec 2017 10:38 PM IST
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चार माह से अमृत स्टोर में नहीं इंप्लांटस
अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। आईजीएमसी में गरीब मरीजों की मदद के लिए खोले गए अमृत स्टोर में पेसमेकर, कार्डियो और ऑर्थो में इस्तेमाल होने वाले इंप्लांटस मरीजों को नहीं मिल पा रहे हैं। अस्पताल में कार्डियोलॉजी और ऑर्थो विभाग की लेटलतीफी सूबे के मरीजों पर भारी पड़ती नजर आ रही है।
प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में गरीब मरीजों की सहूलियत के लिए अमृत फार्मेसी स्टोर खोला गया था। फार्मेसी स्टोर खुलने के बाद लाखों के रुपये के इंप्लांटस यहां पर मरीजों को सस्ती दरों पर मिलने थे। सरकार की यह योजना कारगर भी साबित होनी थी, अगर आईजीएमसी का कार्डियोलॉजी और ऑर्थो विभाग समय रहते अपनी डिमांड प्रबंधन को दे पाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इन दो विभागों की मनमर्जी के कारण आज गरीब मरीज दोबारा से महंगी दरों पर इन इंप्लांटस को खरीदने पर मजबूर हैं। रोजाना औसतन दर्जनों ऑपरेशन होते हैं। ऐसे में मरीजों को पहले की तरह की डॉक्टरों की ओर से बताए गए इंप्लांटस को लाखों रुपये में खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। उधर इस मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अशोक शर्मा ने कहा कि ऑर्थो और कॉर्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्षों से इस मामले पर जल्द प्रपोजल तैयार करने को कहा गया है।
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एक सप्ताह में देनी होगी इंप्लांटस की लिस्ट
दोनों विभागों को इंप्लांटस की लिस्ट को लेकर लिखित में सूचना जारी की जाएगी। एक सप्ताह के भीतर लिस्ट देनी होगी। इसके बाद अमृत फार्मेसी को बोलकर जल्द इंप्लांटस मंगवाए जाएंगे, जिससे गरीब मरीजोें को बाहर लाखों रुपये खर्च न करने पड़ें।
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- डॉ. राहुल रॉव, चिकित्सा उप अधीक्षक, आईजीएमसी

कई बार कहा इंप्लांटस की सूची देने को
अस्पताल में 21 अगस्त को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आईजीएमसी मेडिकल कॉलेज से अमृत स्टोर का शुभारंभ किया था। यह स्टोर कैंसर अस्पताल में खोला गया है, लेकिन यहां पर केवल कैंसर मरीजों को ही दवा मिल पा रही है। सूत्रों का कहना है कि आईजीएमसी के इन दो विभागों को तो कई बार इंप्लांटस की लिस्ट जारी करने को कहा गया है। बावजूद दोनों विभागों और उनके विभागाध्यक्षों के कान पर जूं तक नहीं रेंग पाई है। इसके कारण आज भी मरीजों को बाहर से लाखों रुपये के स्टेंट आदि खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।

कार्डियो विभाग में खुलना था स्टोर
आईजीएमसी के कॉर्डियोलाजी विभाग में ऑपरेशन के दौरान कोई दिक्कत न हो, इसके लिए विभाग को आईजीएमसी के भवन में स्टोर देने की बात कही गई थी लेकिन वर्तमान में स्थिति कुछ और है।


स्टोर खुलने के बाद इन कीमतों पर मिलने थे स्टेंट
अस्पताल में कार्डिक वेस्कुलर सिस्टम के स्टेंट मिलेंगे। दावा किया गया था कि एक लाख का स्टेंट 12 हजार रुपये में मिलेगा। घुटना प्रत्यारोपण को 54 हजार का इंप्लांट 700 रुपये में मिलेगा। जबकि पहले इसकी कीमत एक लाख साठ हजार रुपये थी। जबकि दो लाख पचास हजार रुपये के टाइटेनियम की कीमत भी 76,600 रुपये होगी।
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