सस्ते राशन के लिए बनाए दो लाख फर्जी राशनकार्ड
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प्रदेश के लाखों उपभोक्ताओं को सस्ते राशन के डिपुओं में कम चीनी का कोटा मिल रहा है। हिमाचल में 17 लाख 38 हजार 383 राशनकार्ड उपभोक्ता हैं। इनमें से दो लाख राशनकार्ड धारक ऐसे हैं, जो आबादी के साथ मेल नहीं खा रहे हैं।
इतने राशनकार्ड या तो दोहरे हैं या फर्जी। सरकार इन्हें भी सस्ती चीनी उपलब्ध करा रही है। केंद्र सरकार प्रति उपभोक्ता 700 ग्राम के हिसाब से चीनी दे रही है, जबकि प्रदेश सरकार प्रति उपभोक्ता को 600 ग्राम के हिसाब से चीनी दे रही है।
प्रति राशनकार्ड उपभोक्ताओं से 100 ग्राम चीनी कम मिल रही है।
आबादी से ज्यादा राशनकार्ड
हर महीने 4,698 एमटी चीनी दे रहा केंद्र सरकार प्रदेश के उपभोक्ताओं को 4,698 मीट्रिक टन चीनी मुहैया करा रही है। यह चीनी वर्ष 2010-11 की जनगणना के हिसाब से मुहैया हो रही है।
उस वक्त प्रदेश की आबादी 68 लाख के करीब थी। वर्तमान में राशनकार्ड को आधार मानकर चलें तो आबादी 76 लाख के आसपास है। इसमें 8 लाख की आबादी यानी दो लाख फालतू राशनकार्ड हैं।
वर्तमान में प्रदेश में कुल राशन कार्डों की संख्या 17 लाख 38 हजार 383 है। इसमें साढ़े पांच लाख राशनकार्ड अंत्योदय और बीपीएल परिवार से संबंधित है।
सरकार ने कोटा बढ़ाने की मांग
प्रदेश सरकार दो बार केंद्र सरकार से चीनी का कोटा बढ़ाने की गुहार लगा चुकी है। खाद्य आपूर्ति मंत्री भी दो बार कोटा बढ़ाने को लेकर केंद्रीय मंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने चीनी का कोटा नहीं बढ़ाया है। प्रदेश के लाखों परिवार इस पर निर्भर हैं।
कोटे की चीनी पर कट
खाद्य आपूर्ति विभाग के निदेशक प्रियतू मंडल ने बताया कि केंद्र सरकार प्रति उपभोक्ता को 700 ग्राम चीनी का आवंटन कर रही है, सरकार 600 ग्राम के हिसाब से चीनी दे रही है।
प्रदेश में दो लाख के करीब ऐसे राशनकार्ड बने हैं, जो आबादी से मेल नहीं खा रहे हैं। इन्हें भी चीनी दी जा रही है। सिस्टम ऑनलाइन होने पर फर्जी कार्डों का खुलासा होगा।