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फिर अनसुना रह गया पौंग विस्थापितों का दर्द

Thu, 08 Jun 2017 11:19 PM IST
Updated Thu, 08 Jun 2017 11:19 PM IST
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फिर अनसुना रह गया पौंग विस्थापितों का दर्द
कपिल शर्मा
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ज्वालामुखी (कांगड़ा)। ज्वालामुखी में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के तय कार्यक्रम में किसी कारणवश न पहुंचने से पौंग विस्थापितों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जिला के दूरदराज इलाकों से आए दर्जनों पौंग बांध विस्थापितों का दर्द एक बार फिर अनसुना रह गया।

पौंग बांध विस्थापित समिति अध्यक्ष कुलभूषण ठाकुर और पौंग संघर्ष समिति अध्यक्ष तीर्थ राम शर्मा के नेतृत्व में हंसराज चौधरी, मदनलाल, दलजीत ठाकुर, साहिब सिंह, हुकम चंद गुलेरी, तिलक राम, रामकुमार, सुरजीत सिंह, जोगिंद्र सिंह, प्रीतम सिंह और बंसी लाल ने कहा कि राजस्थान की मुख्यमंत्री के तय कार्यक्रम में न आने से उन्हें मायूसी हाथ लगी है। वे अगले विस चुनाव में उसी पार्टी का साथ देंगे, जो उनकी समस्याओं का हल करेगी अन्यथा उनके साथ खड़े 5 लाख से ज्यादा लोग चुनाव के बहिष्कार से पीछे नहीं हटेंगे। कहा कि जिले के हर विस क्षेत्र में पंचायत स्तर पर कमेटियां गठित करेंगे और गांव-गांव जाकर चुनाव बहिष्कार की अपील की जाएगी। विस्थापित समिति अध्यक्ष कुलभूषण ने कहा कि पौंग बांध से विस्थापित 14080 परिवारों को आवंटन के लिए प्रथम चरण में 15.625 एकड़ प्रति परिवार राजस्थान नहर अनूपगढ़ शाखा और सूरतगढ़ के जैत्सर फार्म में आरक्षित 2.20 लाख एकड़ कमांड भूमि राजस्थान सरकार पीडीओ को आवंटन के लिए रिस्टोर करे। उन्होंने कहा कि इस आरक्षित भूमि के आवंटन की सच्चाई है कि तीन हजार पीडीओ के आवंटन ही मौजूद हैं। शेष 1,70,000 एकड़ भूमि आवंटन वर्ष 1972 के कानूनों का उल्लंघन कर सरकार अपने चहेतों को बांट चुकी है। यदि पीडीओ की यह भूमि उनके लिए आरक्षित हो जाए तो किसी भी पीडीओ को जैसलमेर जिला की अनारक्षित भूमि देने का प्रश्न नहीं उठता। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार पीडीओ को मनमर्जी से द्वितीय चरण की तथाकथित आरक्षित भूमि नाचना, मोहनगढ़ और रामगढ़ में आवंटित कर रही है जो वाहमी समझौते की अवमानना है। राजस्थान सरकार पीडीओ को वहां भेजने से पहले खुद तैयार किया हुआ सहमति पत्र ले रही है जो कि गलत है और हिमाचल सरकार इसे तत्काल बंद करवाए। जो पीडीओ वहां भेजे जा चुके हैं ,उन्हें फेस-एक में रिस्टोर की गई 2.20 लाख एकड़ भूमि को स्थानीय लोगों से खाली करवाकर उन्हें बदले में दी जाए।
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