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पीने लायक नहीं रहा बावड़ियों-हैंडपंप का पानी, सैंपल फेल
Updated Tue, 24 Jul 2018 12:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में नगर निगम की ओर से दी जाने वाली पानी की सप्लाई समेत कई प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के सैंपल फेल हो गए हैं। इनके पानी में पीलिया और इंफेक्शन फैलाने वाला इंटरोबेक्टर और सिट्रोबेक्टर बैक्टीरिया पाया गया है।
खुद नगर निगम की ओर से नाभा और फागली में दी जाने वाली सप्लाई में भी यह बैक्टीरिया पाया गया है। सैंपल फेल होने से क्लोरीनेशन का दावा करने वाले नगर निगम के दावों की पोल खुल गई है। आईजीएमसी की ओर से सोमवार को मिली ताजा रिपोर्ट में कई और सैंपल फैल होने से हड़कंप मच गया है। नाभा को दी जाने वाली पानी की सप्लाई और फागली स्कूल के पास सार्वजनिक नल का पानी भी दूषित पाया गया है। इसके अलावा मेयर के अनाडेल वार्ड में हैंडपंप और विकासनगर के आंजी में बावड़ी, शनान स्थित हैंडपंप, हाउसिंग बोर्ड कालोनी की बावड़ी, शनान के रामकृष्ण और शेरसिंह के भवन का पानी भी पीने लायक नहीं पाया गया है।
प्राकृतिक स्रोतों का पानी जहरीला
शहर में पिछले एक महीने में लिए ज्यादातर प्राकृतिक स्रोतों का पानी पीने लायक नहीं पाया गया है। इन सबके सैंपल फेल हो गए हैं। हैंडपंप से लेकर प्राकृतिक चश्मे और बावड़ियों का पानी पीने लायक नहीं रहा। नगर निगम ने इनका पानी पीने के लिए इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। निगम ने टंकियों की सफाई करने को भी कहा है। मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि जिन पेयजल स्रोतों के सैंपल फेल हो गए हैं, वहां लिखित चेतावनी देकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। लोग पानी उबालकर ही पीने के लिए इस्तेमाल करें।
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पार्षद ने आयुक्त को लिखा पत्र
नाभा वार्ड में पानी के सैंपल फेल होने पर पार्षद सिमी नंदा ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने की मांग की है। पार्षद ने कहा कि गंदे पानी की सप्लाई से पीलिया जैसी जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है। कहा कि यह निगम की जिम्मेदारी है कि वह पीने लायक पानी मुहैया करवाए। पार्षद ने आयुक्त को इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
शिमला। शहर में नगर निगम की ओर से दी जाने वाली पानी की सप्लाई समेत कई प्राकृतिक पेयजल स्रोतों के सैंपल फेल हो गए हैं। इनके पानी में पीलिया और इंफेक्शन फैलाने वाला इंटरोबेक्टर और सिट्रोबेक्टर बैक्टीरिया पाया गया है।
खुद नगर निगम की ओर से नाभा और फागली में दी जाने वाली सप्लाई में भी यह बैक्टीरिया पाया गया है। सैंपल फेल होने से क्लोरीनेशन का दावा करने वाले नगर निगम के दावों की पोल खुल गई है। आईजीएमसी की ओर से सोमवार को मिली ताजा रिपोर्ट में कई और सैंपल फैल होने से हड़कंप मच गया है। नाभा को दी जाने वाली पानी की सप्लाई और फागली स्कूल के पास सार्वजनिक नल का पानी भी दूषित पाया गया है। इसके अलावा मेयर के अनाडेल वार्ड में हैंडपंप और विकासनगर के आंजी में बावड़ी, शनान स्थित हैंडपंप, हाउसिंग बोर्ड कालोनी की बावड़ी, शनान के रामकृष्ण और शेरसिंह के भवन का पानी भी पीने लायक नहीं पाया गया है।
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प्राकृतिक स्रोतों का पानी जहरीला
शहर में पिछले एक महीने में लिए ज्यादातर प्राकृतिक स्रोतों का पानी पीने लायक नहीं पाया गया है। इन सबके सैंपल फेल हो गए हैं। हैंडपंप से लेकर प्राकृतिक चश्मे और बावड़ियों का पानी पीने लायक नहीं रहा। नगर निगम ने इनका पानी पीने के लिए इस्तेमाल न करने की सलाह दी है। निगम ने टंकियों की सफाई करने को भी कहा है। मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि जिन पेयजल स्रोतों के सैंपल फेल हो गए हैं, वहां लिखित चेतावनी देकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। लोग पानी उबालकर ही पीने के लिए इस्तेमाल करें।
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पार्षद ने आयुक्त को लिखा पत्र
नाभा वार्ड में पानी के सैंपल फेल होने पर पार्षद सिमी नंदा ने नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाने की मांग की है। पार्षद ने कहा कि गंदे पानी की सप्लाई से पीलिया जैसी जलजनित बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ रहा है। कहा कि यह निगम की जिम्मेदारी है कि वह पीने लायक पानी मुहैया करवाए। पार्षद ने आयुक्त को इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।