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गुरदासपुर: तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्राली ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को कुचला, मौके पर मौत

गुरदासपुर में हादसे में दो युवकों की मौत होने का मामला सामने आया है। तेज रफ्तार एक ट्रैक्टर-ट्राली ने मोटरसाइकिल सवार दो युवकों को बुरी तरह से कुचल दिया। जिस कारण मोटरसाइकिल सवार दोनों युवकों की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। घटना गुरदासपुर के हरदोछननी रोड पर घटित हुई है। थाना सदर पुलिस ने मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल गुरदासपुर में शव गृह में रखवा दिए हैं।

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थाना सदर के प्रभारी जतिंदर ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल गुरदासपुर में भेज दिया गया है। ट्रैक्टर-ट्राली चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया जा रहा है। मृतकों की अभी पहचान नहीं हुई है। दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है।
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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

पंजाब: बठिंडा में फार्मास्यूटिकल पार्क बनाए जाने की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्री मनसुख एल मांडविया से मिले वित्त मंत्री मनप्रीत बादल

पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रसायन, उर्वरक एवं फार्मास्यूटिकल मंत्री मनसुख एल मांडविया से मुलाकात करके बठिंडा में फार्मास्यूटिकल पार्क बनाए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पार्क पूरे देश, खासकर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के लिए उपयोगी साबित होगा। केंद्रीय मंत्री ने मनप्रीत बादल की मांग पर ध्यानपूर्वक विचार करने के बाद भरोसा दिया कि इस फार्मा पार्क के लिए वह बठिंडा को सबसे अधिक प्राथमिकता देंगे। मनप्रीत बादल ने कहा कि सरहदी राज्य होने के कारण पंजाब के लिए अपने नौजवानों को रोजगार देना बेहद जरूरी है, ताकि वह पड़ोसी दुश्मनों के गलत मंसूबों का शिकार होने से बच सकें।

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तीन लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
बादल ने कहा कि बठिंडा में फार्मास्यूटिकल पार्क की स्थापना से लगभग एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और करीब दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार मिलेगा। बठिंडा में पूरी तरह कार्यशील ए स्तर का रेलवे स्टेशन, 1350 एकड़ से अधिक जमीन और तेल रिफाइनरी उपलब्ध है, जो इस जगह को फार्मा पार्क के लिए उपयुक्त बनाता है। इसके साथ ही 134 एकड़ में मौजूद पानी के विभिन्न स्रोत और झीलें इस फार्मा पार्क को स्थापित करने, इसके रखरखाव और संचालन के लिए लाभप्रद होंगे।

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कई संस्थानों को मिलेगा लाभ
बादल ने बताया कि फार्मा उद्योग को यूएसएफडीए से मंजूरशुदा बड़ी फार्मास्यूटिकल कंपनियों सन फार्मा, सेंट्रिएंट और आईओएल केमिकल्स से भी सहायता प्राप्त होगी। बठिंडा में इस पार्क को स्थापित करने से आरएंडडी ईको सिस्टम, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाईपर), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) और नैनो टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट, मोहाली के अलावा ऑल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स, बठिंडा) और माईक्रोबायल टेक्नोलॉजी संस्थान को भी लाभ मिलेगा।
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पंजाब की सियासत : कैप्टन की पाकिस्तानी मित्र पर बढ़ रही है कलह, निशाने पर अमरिंदर, नुकसान में कांग्रेस

पंजाब कांग्रेस में कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। कैप्टन-सिद्धू में शुरू हुई लड़ाई अब अरूसा आलम तक पहुंच गई है। गृहमंत्री रंधावा ने अरूसा आलम के आईएसआई से संबंधों की जांच के आदेश शुक्रवार को जारी कर दिए हैं। इससे भड़के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गृहमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा को एक के बाद एक ट्वीट के जरिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने रंधावा की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, सूबे के पुलिस महानिदेशक को एक ऐसे मामले की जांच में लगा दिया है, जिसका कोई आधार ही नहीं है। 

कैप्टन ने शुक्रवार को अपने पहले ट्वीट में रंधावा से पूछा कि ‘आप मेरी कैबिनेट में मंत्री थे। आपने कभी अरूसा आलम के बारे में शिकायत नहीं सुनी। वह 16 साल से भारत सरकार की मंजूरी के बाद ही भारत आ रही थीं। अब आप यह आरोप लगा रहे हैं कि इस अवधि में एनडीए और यूपीए दोनों सरकारों ने पाक आईएसआई के साथ मिलीभगत की थी?

दूसरे ट्वीट में कैप्टन ने लिखा- ऐसे समय में जब आतंकवाद का खतरा है और त्योहार नजदीक हैं, राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय आपने डीजीपी को एक आधारहीन जांच पर लगा दिया है।

तीसरे ट्वीट में रंधावा को लिखा- ‘तो अब आप निजी हमले कर रहे हैं। यह पद संभालने के एक माह बाद क्या अब आप लोगों को अपनी यह उपलब्धि दिखाएंगे? बरगाड़ी और ड्रग्स के मामले में आपके लंबे वादों का क्या हुआ? पंजाब अब भी आपके वादे के मुताबिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।

विवाद की वजह: कैप्टन की महिला मित्र के खिलाफ जांच के आदेश 
पंजाब सरकार ने शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अरूसा आलम के संबंधों और आईएसआई के साथ अरूसा के संबंधों की जांच के आदेश विधिवत रूप से जारी कर दिए। उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री सुखजिंदर रंधावा ने वीरवार को जालंधर में यह एलान किया था कि सरकार अरूसा आलम के आईएसआई लिंक की जांच करेगी। 



रंधावा का कहना है कि कैप्टन चार-पांच साल से पाकिस्तान से आने वाले ड्रोन का मुद्दा उठाते रहे हैं और बार-बार कहते रहे हैं कि राज्य को आईएसआई से खतरा है। इसलिए हम उनकी पाकिस्तानी महिला मित्र के आईएसआई के संबंधों की जांच भी करेंगे। कैप्टन किस आधार पर आईएसआई के खतरे की बात करते रहे हैं। उनके पास इस संबंध में क्या जानकारी है? 

इस बीच, सियासी हलकों में प्रदेश सरकार की ओर से अपनी ही पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री व उनकी मित्र के खिलाफ जांच शुरू होने को दोनों पक्षों के लिए हानिकारक माना जा रहा है, क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों पक्षों के परस्पर उलझे रहने से अन्य दलों को लाभ पहुंच सकता है।
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भवाई रावणलीला फिल्म पर रोक लगाने की मांग: हाईकोर्ट ने कहा, पहले फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष रखी जाए मांग, याचिका खारिज

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करते हुए हाल ही में रिलीज हुई फिल्म भवाई रावणलीला को प्रदर्शित करने पर रोक की मांग की गई है। याची ने कहा कि यह फिल्म हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है। हाईकोर्ट ने कहा कि पहले फिल्म प्रमाणन बोर्ड और केंद्र सरकार के समक्ष मांग रखी जाए। इस पर याची ने याचिका को वापस ले लिया।

होशियारपुर के अजय कुमार ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सभी हिंदू भगवान राम और माता सीता के प्रति अथाह आस्था रखते हैं। इस फिल्म को देखने के बाद माता सीता को फिल्म में प्रदर्शित करते हुए आपत्तिजनक दृश्य फिल्माए गए हैं। फिल्म में दर्शाया गया है कि माता सीता का रावण से प्रेम प्रसंग है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।

याची ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का यह अर्थ नहीं है कि किसी को किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करने की छूट दे दी जाए। साथ ही सेंसर बोर्ड पर भी सवाल उठाया गया कि कैसे इस प्रकार की फिल्म को प्रदर्शित करने की अनुमति दे दी गई। याची ने बताया कि फिल्म प्रदर्शन पर रोक के लिए याची ने 25 सितंबर को लुधियाना के डीसी को मांग पत्र भी दिया था। कोई कार्रवाई न होने पर अब याची को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी है।

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हाईकोर्ट ने कहा कि जनहित याचिका दाखिल करने के अतिरिक्त याची के पास और विकल्प मौजूद थे। याची को चाहिए कि वह पहले सेंसर बोर्ड के समक्ष अपनी मांग को रखे। इस पर हाईकोर्ट से यह याचिका वापस लेने की छूट मांगी गई। हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लेने की छूट देते हुए इसे खारिज कर दिया।
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पंजाब: कांग्रेस की मुश्किल बने सिद्धू और कैप्टन, संयुक्त बैठक में सीएम चन्नी ने किया मंथन

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी ही सरकार पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और मौजूदा मंत्रियों के बीच छिड़ी जंग ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को बुरी तरह आहत किया है।

शुक्रवार को इन हालात पर चर्चा के लिए उन्होंने अपने मंत्रियों और सीनियर विधायकों के साथ एक बैठक की, जिसमें उन्होंने हालात पर नाराजगी जताई। इसे उप मुख्यमंत्री रंधावा व कैप्टन के बीच हुई ताजा तकरार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में नवजोत सिद्धू के अलावा कैप्टन द्वारा नई पार्टी बनाने के एलान संबंधी मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
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सियासत: राघव चड्ढा का सीएम चन्नी पर कटाक्ष, कहा- मुख्यमंत्री नहीं कैंपेन मंत्री, मूल मंत्र है लाइट-कैमरा बट नो एक्शन

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय नेता एवं पंजाब मामलों के सह-प्रभारी व दिल्ली से विधायक राघव चड्ढा ने कहा कि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लाइट और कैमरा तो पसंद है, लेकिन वह नो एक्शन वाले सीएम हैं। मुख्यमंत्री चन्नी ने गुलाबी सुंडी से प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर बठिंडा के दो किसानों के साथ फोटो खिंचवाई और उन तस्वीरों को पंजाब भर में दीवारों पर, बसों के पीछे व बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन समेत अन्य जगहों पर लगे होर्डिंग पर लगवा प्रचार-प्रसार तो खूब किया, लेकिन उन किसानों को मुआवजा अब तक नहीं मिला।

चंडीगढ़ पार्टी मुख्यालय में शुक्रवार को राघव चड्ढा ने रोपड़ से विधायक अमरजीत सिंह संदोआ, पार्टी के जनरल सेक्रेटरी हरचंद सिंह बरसट, प्रवक्ता जगतार सिंह संघेड़ा व दत्तसन्नी अहलूवालिया के साथ प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि कैमरे के शौकीन व विज्ञापन के दीवाने ड्रामेबाज मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने किसानों को जबरदस्ती झप्पी डाली लेकिन मुआवजे के नाम पर उन्हें धोखा दिया।

बताया कि गुलाबी सुंडी से प्रभावित किसान सरदार बलविंदर सिंह खालसा को झप्पी तो डाली, लेकिन मुआवजे के नाम पर उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी। बलविंदर सिंह खालसा भी अब कहने लगे हैं कि तुझे तो मुख्यमंत्री ने झप्पी डाली थी, अब तू ही हमें मुआवजा दिलवा।

राघव चड्ढा ने कहा कि मुख्यमंत्री चन्नी ने दूसरे किसान हरप्रीत सिंह की फोटो को भी हर बस के पीछे लगाकर चुनाव के लिए खूब प्रचार-प्रसार किया, लेकिन सरकार ने उनकी भी कोई मदद नहीं की। चन्नी मुख्यमंत्री नहीं बल्कि कैंपेन मंत्री हैं। मुख्यमंत्री चन्नी को फिल्म की शूटिंग की तरह लाइट और कैमरा तो पसंद है, लेकिन एक्शन पसंद नहीं है।
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पंजाब में डेंगू का कहर: मरीजों की संख्या 10 हजार के पार, 22 जिलों से लिए गए 28 हजार नमूनों में हुआ खुलासा

पंजाब में डेंगू को लेकर हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब सूबे में डेंगू संक्रमितों का आंकड़ा 10 हजार के पार हो गया है। 22 जिलों में लगभग 28,000 नमूनों की जांच में ये परिणाम आए हैं। सरकार ने बढ़ते संक्रमण के बाद सिविल सर्जनों क्राइसिस मैनेजमेंट मोड में रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि लापरवाही करने पर वह तबादले के लिए तैयार रहें।

डेंगू को लेकर सूबे में लोग लगातार लापरवाही बरते हैं। हाल ही में 12.80 लाख घरों के किए गए निरीक्षण में 21,683 घरों में लारवा मिलने की पुष्टि हुई है। मजबूरी में घरों में लोगों की लापरवाही को देखते हुए पंजाब सरकार ने ड्राई-डे में परिवर्तन करते हुए शुक्रवार के बजाय रविवार कर दिया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों का असर अब दिखने लगा हैं। पिछले हफ्ते के मुकाबले इस हफ्ते कुछ जिलों में डेंगू के मामलों की संख्या में कुछ कमी पाई गई है।

अब सरकार ने जिलों में तैनात सभी सिविल सर्जनों की जिम्मेदारी तय कर दी है। उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि वह क्राइसिस मैनेजमेंट मोड में सक्रियता के साथ काम करें, नहीं तो तबादले के लिए तैयार रहें।

शहरों में 80 प्रतिशत मामले
डेंगू के 80 फीसदी मामले शहरों में सामने आए हैं। शहरों में बढ़ रहे डेंगू के मामलों को रोकने के लिए स्टेट टास्क फोर्स की जिम्मेदारी तय की गई है। फोर्स को डेंगू रोकथाम के उपायों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया। साथ ही शहरी क्षेत्रों में जलभराव वाले स्थानों पर कीटनाशक छिड़काव करने को भी कहा।

2020 में हुई थीं 22 मौतें
साल 2020 में डेंगू के 8345 केस आए थे और 22 मौतें हुई थीं। मौजूदा वर्ष के दौरान लोगों में संक्रमण की दर तो ज्यादा मिली है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अभी तक डेंगू से किसी की मौत नहीं होने की पुष्टि हुई है। पिछले दो वर्षों से राज्य में कोई भी चिकनगुनिया का केस भी सामने नहीं आया है।
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पंजाब: दवा विक्रेताओं को नशे की दवाओं के भंडारण, बिक्री और वितरण का रखना होगा रिकॉर्ड, उप मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश

नशे के खिलाफ पंजाब सरकार ने 100 दिन का रोडमैप तैयार कर लिया है। दवा विक्रेताओं को अब नशे की दवाओं का भंडारण, बिक्री और वितरण संबंधी रिकॉर्ड रखने को कहा गया है। ड्रग कंट्रोलरों को इस पर नजर रखने को कहा गया है। उप मुख्यमंत्री ओपी सोनी ने दवाओं की बिक्री और खरीदारी संबंधी सही रिकॉर्ड न रखने वाली फर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सोनी ने कहा कि लोगों में, खास कर युवा पीढ़ी में नशे की आदत का कारण बनने वाली सभी दवाओं को सीमित किया जाना चाहिए। इनकी सिर्फ सावधानी के साथ ही बिक्री की इजाजत दी जाए। उन्होंने अधिकारियों को राज्य में नशे की आदत डालने वाली दवाओं के भंडारण, बिक्री और वितरण पर पैनी नजर रखने के लिए कहा।

सोनी ने कहा कि हाल ही में देखा गया है कि युवाओं द्वारा प्रीगैबलिन वाले कैप्सूल और गोलियों का प्रयोग नशे के लिए किया जा रहा है। इसलिए, फूड एंड ड्रग एडमनिस्ट्रेशन के ड्रग कंट्रोल अफसरों को जांच के निर्देश दिए हैं। ड्रग्ज और कास्मेटिक्स एक्ट की धाराओं के तहत उन फर्मों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किये गए हैं। मंत्री ने कहा कि हमें यह यकीनी बनाने की जरूरत है कि ऐसी दवाएं केवल उचित प्रयोग के लिए बनाईं और बेची जाएं।

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उन्होंने बताया कि केमिस्ट एसोसिएशन को नशे की आदत डालने वाली दवाओं के इस खतरे से निपटने के लिए राज्य की एजेंसियों के सहयोग के लिए आगे आने के लिए कहा जा रहा है। विभाग पहले ही केमिस्ट एसोसिएशन और विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ सेमिनारों और बैठकों का आयोजन कर लोगों तक पहुंच बना रहा है। ‘100 दिनों के रोडमैप’ के तहत उनको नशे के बुरे प्रभावों बारे जागरूक कर रहा है।
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