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मैं सोचती रही कि बटियों को ठंड लग रही इस लिए चला दी थी अंगीठी-मृत्क बहनों की मां

Sat, 06 Jan 2018 10:25 PM IST
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:25 PM IST
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मैं सोचती रही कि बटियों को ठंड लग रही इस लिए चला दी थी अंगीठी-मृत्क बहनों की मां
जान से प्यारी बच्चियों का चेहरा देखते ही बेहोश हुई मां
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ठंड से बीमार बच्ची को बचाने के लिए मां ने अंगीठी जला बंद कर दिए थे दरवाजे और खिड़कियां
नेपाल की दो बहनों की अंगीठी की गैस चढ़ने से हुई मौत का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
जिले के गांव माइसरखाना स्थित मंदिर के परिसर में रहने वाले एक नेपाली परिवार को अंगीठी की गैस ने अपनी चपेट में ले लिया। जिसके चलते गैस चढ़ने से दो बहनों रंजना (10) और मनीषा (8) साल की तो मौत हो गई। जबकि माता पिता समेेत तीन लोग बेहोश हो गए। उन्हें उपचार के लिए मौड मंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पर अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं अंगीठी की गैस चढ़ने से मौत के मुंह में गई दोनों बेटियों के अंतिम संस्कार के मौके बेटियों की माता मीणा सुनार ने भावुक होते हुए कहा कि उसे तो लग रहा था कि दोनों बेटियों को ठंड लग रही है। इसीलिए उसने अंगीठी तेज कर दी और कमरे हर तरफ से बंद कर दिए कि बेटियों को राहत मिलेगी। लेकिन क्या पता था कि बेटियों को वह राहत नहीं हाथों से मौत दे रही है। इसके बाद जब बेटियों का आखिरी बार मुंह देखने लगी मां तो बेहोश होकर गिर गई। जिस को मौके पर मौजूद लोगों ने बड़ी मुश्किल से संभाला। यह घटना वीरवार रात की बताई जा रही है और शुक्रवार को सुबह इस घटना के बारे में लोगों को पता चला था।

नेपाली मूल के लक्ष्मण सुनार पिछले कई वर्षों से माता माइसरखाना के मंदिर में बने भंडारे की रसोई में खाना व लंगर पकाने का काम करते आ रहा हैं। पत्नी मीणा सुनार व तीन बेटियां रंजना, मनीषा और बड़ी बेटी आशा सहित मंदिर के एक कमरे में ही रह रहा थे। वीरवार रात को जब ठंड ज्यादा हो गई थी तो सोते समय सबसे छोटी बेटी मनीषा की अचानक तबीयत खराब हो गई। मां मीणा ने बच्ची को ठंड से बचाने के लिए अंगीठी चला दी, ताकि बच्ची को राहत मिल सकें, लेकिन इसके थोड़ी देर बाद ही दूसरी बच्ची रंजना की तबीयत खराब हुई तो मां ने अंगीठी को और तेज कर दिया। जिसके बाद मां मीणा पति व बच्चों समेत सो गई। लेकिन शुक्रवार को सुबह जब काफी देर तक परिवार न उठा तो मंदिर में आए एक कमेटी सदस्य परिवार को जगाने पहुंचा तो पांचों बेहोशी की हालत में पडे़ थे। यह देख मंदिर कमेटी सदस्य ने सूचना मंदिर के मैनेजर को दी। तुरंत पांचों को एंबुलेंस के जरिये उपचार के लिए मौड़मंडी के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने मनीषा व रंजना को मृतक घोषित कर दिया और बेहोश नेपाली लक्ष्मण सुनार और उसकी पत्नी मीणा सुनार व बड़ी बेटी आशा का उपचार शुरू कर दिया। जिनको थोड़ी देर बाद जब होश आया तो पूरी घटना सामने आ गई। शनिवार को दोनों बहनों के शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों के हवाले कर दिए। जिन्होंने दोपहर में पुलिस की मौजूूदगी में दोनों बहनों का अंतिम संस्कार किया। इस संबंध में डीएसपी सुरिंदर कुमार का कहना था कि पुलिस ने मामले में 174 की कार्रवाई कर शव परिजनों के हवाले कर दिए थे। दोनों बहनों की मौत अंगीठी की गैस से हुई है।
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