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नशे में 80 लाख बर्बाद: चिट्टा, स्मैक और मेडिकल ड्रग्स सब किया... दो साल से नशा छोड़ मिसाल बना मनप्रीत
Sun, 30 Mar 2025 12:33 PM IST
अंकेश ठाकुर
कपिल गर्ग, बरनाला
कपिल गर्ग, बरनाला
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 30 Mar 2025 12:33 PM IST
सार
पंजाब में नशा सबसे बड़ी समस्या है। युवा नशे के दलदल में धंसते जा रहे हैं। इसी बीच एक ऐसा शख्स भी है जो नशे के दलदल से बाहर निकला और अब नशा विरोधी मुहीम में जुड़कर युवाओं के लिए मिसाल बन चुका है।
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परिवार के साथ मनप्रीत सिंह।
- फोटो : संवाद
विस्तार
इंसान की इच्छाशक्ति उसे जिंदगी के हर मुकाम पर कामयाबी दिला देती है इसकी बड़ी मिसाल 17-18 वर्षों से चिट्टा, स्मैक, हेरोइन, मेडिकल नशा सहित हर तरीके का नशा करने वाला मनप्रीत सिंह है, जो नशा छोड़कर गांव और इलाके के लिए मिसाल बन चुका है।
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बरनाला जिले का मनप्रीत नशा विरोधी मुहिम में रोल मॉडल बन युवाओं को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करने का काम कर रहा है। बरनाला के कस्बा धनौला का युवक मनप्रीत किसान परिवार से संबंध रखता है, पिछले तकरीबन 18 वर्षों से नशे में डूबा हुआ था। नशे पर 70-80 लाख रुपया खर्च कर चुका है। परिवार खौफ और दहशत भरे माहौल में जी रहा था। मनप्रीत की धर्मपत्नी अपने छोटे बच्चे को लेकर बाथरूम में छिपकर रात बिताती थी। मनप्रीत को जब नशा नहीं मिलता था घर में तोड़फोड़ मारपीट और खुद को बुरी तरीके से जख्मी करना उसके लिए आम बात थी।
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अमृतपान कर नशा न करने की कसम खाई और निभाई भी
इस हालत में मनप्रीत सिंह के पिता की भी मौत हो गई। आखिर एक दिन मनप्रीत ने अपने मनोबल शक्ति से कोशिश की और अमृतपान कर नशा न करने की कसम खाई और आज 2 साल से उसने नशा छोड़ दिया है और गांव में मिसाल बना हुआ है गांव के लोगों और साथियों को भी समझा रहा है। पंजाब सरकार के नशा विरुद्ध मुहिम युद्ध नशा विरुद्ध के तहत लोगों को नशा छोड़ने के लिए सोशल मीडिया पर जागरूक कर रहा है।
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आज मनप्रीत के परिवार में हंसी-खुशी का माहौल है। मनप्रीत सिंह अपने परिवार के हर काम सहयोग देता है। खेतों में काम करता और मुस्कुराता नजर आता है।
घर में रहता था दहशत और खौफ का माहौल
डीसी बरनाला ने भी मनप्रीत सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे नौजवान मिसाल हैं जो नशा ठुकराकर नशे में डूबे नौजवानों के लिए मिसाल बने हुए हैं। सरकार और प्रशासन उन्हें सम्मानित करते हैं। मनप्रीत की धर्मपत्नी राजविंदर कौर, मौसी कर्मजीत कौर और दादाजी विकर सिंह ने बताया जब मनप्रीत सिंह पूरी तरह नशे में डूबा हुआ था, घर में दहशत और खौफ का माहौल होता था। तोड़फोड़ मारपीट मौत का तांडव घर में मचा रहता था। हर पल यही डर सताता था कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए। गांव में मारपीट लड़ाई-झगड़ा आम बात थी और इस हालत में मनप्रीत सिंह के पिता की भी मौत हो गई। आज वाहेगुरु ने हमारी सुन ली और मनप्रीत ने नशा छोड़ दिया। अब वह एक जिम्मेदार इंसान बनकर अपने परिवार की देखभाल कर रहा है और लोगों को भी नशे के विरुद्ध जागरूक कर रहा है।