गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने चंदौली जिले के सकलहीहा स्थित महाकालेश्वर नाथ को धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर उभारने का फैसला किया है। आगे की स्लाइड में जानें इस प्राचीन मंदिर की खासियत...
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nath temple in Chandauli
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाथ संप्रदाय के इस बेहद खास स्वयंभू शिवलिंग महाकालेश्वरनाथ मंदिर का निर्माण दो सौ वर्ष पूर्व सकलडीहा कोट के जमींदर बख्श सिंह ने कराया था। पहले वहां पीपल का वृक्ष था। बताते हैं कि बख्श सिंह एक दिन पीपल की छांव में आराम कर रहे थे। तभी वहां एक सर्प आ गया। जमींदार की नजर पड़ते ही वह सर्प गायब हो गया।
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रात को स्वप्न में वही सर्प फिर दिखा और आवाज सुनाई दी कि पीपल के नीचे साक्षात शिवजी का वास है। अगली सुबह जब बख्श सिंह वहां पहुंचे तो पीपल वृक्ष अपने आप जड़ से उखड़ कर धराशाई हो गया। जमींदार ने वहां खुदाई शुरू कराई तो पहले हनुमान जी निकले फिर वहां पर स्वयंभू शिवलिंग दिखाई दिया। इसके बाद जमींदार बख्श सिंह ने वहां मंदिर का निर्माण कराया।
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पहले जमींदार के पुरोहित ही इस मंदिर में पुजारी थे। 1982 में यह मंदिर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद से संबद्धहो गया। अब विश्वनाथ मंदिर न्यास से जुड़े नाथ परंपरा के इस मंदिर में अब चार प्रहर की आरती होगी। शैव मार्गीय नाथ संप्रदाय की पूजा पद्धति लागू होगी। इसके लिए महाकालेश्वर नाथ परियोजना तैयार की गई है। जल्द ही इसका प्रजेंटेशन सीएम के समक्ष किया जाएगा।
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हाल में ही सीएम ने मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण और सीईओ एसएन त्रिपाठी को बुलाकर विश्वनाथ मंदिर के साथ-साथ इससे जुड़े मंदिरों के कायाकल्प पर मंत्रणा की थी। अब न्यास परिषद ने सकलडीहा में स्थित महाकालेश्वर नाथ मंदिर को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विस्तार देने की योजना बनाई है। मंदिर में चार प्रहर की आरती की योजना को मूर्त रूप देने के लिए वहां 20 से अधिक अर्चक और सेवादार तैनात किए जाएंगे।