विराग के स्वर के लिए मशहूर सुबह-ए-बनारस में शनिवार को जनतंत्र का राग छिड़ा। गंगा पार रेती से सूरज की पहली किरण घाटों को सुनहरा बनाने ही लगी थी कि स्कूल-कॉलेज के छात्र-छात्राओं का अपने-अपने परिधान में पहुंच सिलसिला शुरू हो गया। सबने एक-दूजे का हाथ थामा और अस्सी से दशाश्वमेध घाट तक एक कवच बन गया। लोकतंत्र की सुरक्षा और सुदृढ़ता का कवच। एक सतरंगी तस्वीर उभर गई। ये रंग तब और गाढ़े हो गए, जब सबने एक स्वर से शपथ ली कि अबकी आधी-अधूरा नहीं बल्कि मुकम्मल लोकतंत्र की रचना के लिए काशी शत-प्रतिशत मतदान करेगी।
अमर उजाला और जिला प्रशासन के आह्वान पर ‘गंगा की सौगंध मतदान करेंगे हम...’ कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए स्कूलों के बच्चे, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, चित्रकार, रंगकर्मी, उद्यमी, कारोबारी, बटुकों और महिलाओं की जुटान गंगा घाटों पर पौ फटने से ही होने लगी। सेठ एमआर जैपुरिया स्कूल के बच्चे अस्सी घाट पर आने लगे और सीढ़ियों पर कतारबद्ध बैठते गए और कुछ ही देर में वहां तिरंगा लहराने लगा। गोपी राधा बालिका विद्यालय की छात्राएं ‘सारे काम छोड़ दो, सबसे पहले वोट दो’ का घोष करती हुईं रीवा घाट, गंगा महाल घाट और तुलसी घाट तक एक-दूजे का हाथ थामते हुए बढ़ गईं।
फिर तो यह कारवां बढ़ते हुए भदैनी, हरिश्चंद्र घाट, चेतसिंह घाट, हरिश्चंद्र घाट, शीतला घाट होते हुए दशाश्वमेध घाट तक पहुंच गया। एक-एक कर हजारों बच्चों ने एक-दूजे का हाथ थाम कर एक कड़ी बना ली। मुकम्मल जम्हूरियत का एक नक्शा बना डाला। जनमिलन हुआ तो रंग बिखरने लगे। कोई चित्र बनाता नजर आया तो कोई राग-रागिनी छेड़ने लगा। रह-रह कर ‘हर-हर महादेव’ का घोष भी गूंजता रहा। इस तरह ‘सात वार और नौ त्योहार’ वाली काशी में दसवां उत्सव लोकतंत्र शुमार हो गया।
बच्चों को मतदान की शपथ लेते देख सैलानी, श्रद्धालु और साधु भी खुद को रोक न सके। दशाश्वमेध घाट पर स्नान और पूजन के बाद वे भी मानव शृंखला का हिस्सा बन गए। अब बात केवल घाट तक नहीं रह गई थी। उनके साथ यह यकीनन काशी का यह संकल्प दूर देश के गांव-गांव, घर-घर पहुंचेगा। महान मकसद पर निकले लोगों के उल्लास को सहयोग और सेवा से तर करने वालों की कमी न थी। जगह-जगह शरबत, पानी का इंतजाम किया गया था। शपथ और राष्ट्रगान के बाद जब बच्चे अपने घरों को लौटे तो उनके साथ भी मतदान का संदेश गली-मुहल्लों तक गूंजा। आर्य महिला बालिका इंटर कॉलेज और सनातन धर्म इंटर कॉलेज के बच्चे कतारबद्ध होकर अपने शिक्षा मंदिर की ओर बढ़े तो लगा दशाश्वमेध से चेतगंज तक एक नदी बह चली।
आयोजन के समापन होने तक देश की सबसे बड़ी पंचायत के लिए 19 मई को मजबूत लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी का संकल्प और संदेश ठीक वैसे ही पसर गया, जैसे गंगा पार रेती से निकला एक नारंगी गोला जब क्षितिज में पर चढ़कर ‘काश्यते प्रकाश्यते इति काशी’ को साकार कर देता है।