मुंबई के बांद्रा में लॉक डाउन के बावजूद भीड़ जुटाने का मुख्य आरोपी विनय कुमार दूबे बनारस की सियासत में भी भाग्य आजमा चुका है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में शहर उत्तरी सीट से वह एनसीपी का प्रत्याशी बना था। मगर, इस चुनाव में जमानत जब्त कराकर वह मुंबई लौट गया था और मुंबई की सियासत में ही सक्रिय हो गया था।
बांद्रा में भीड़ जुटाने का आरोपी विनय दुबे बनारस में जमानत जब्त कराकर मुंबई की सियासत में हो गया था सक्रिय
मुंबई में रहने वाला औराई के हरिनारायणपुर निवासी विनय कुमार दूबे वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अचानक शहर उत्तरी से पर्चा भर दिया था। एनसीपी का जनाधार बनारस में बेहद कम होने के कारण वह बहुत सुर्खियों में नहीं रहा था और चुनाव में उसे महज 574 मतों से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में रविन्द्र जायसवाल के साथ मैदान में था और उसकी उम्र 27 साल थी। रविंद्र जायसवाल 47746 मत पाकर विजयी हुए थे।
बनारस में जमानत जब्त होने के बाद वह सीध मुंबई लौट गया और पूर्वांचल के बड़े केंद्र बनारस में विधानसभा प्रत्याशी को उसने मुंबई में अपना राजनीतिक हथियार बनाया। जमानत जब्त होने के बाद भी उत्तर भारतीय समाज के नेता में रुप में उभरने के बाद वह बनारस में बहुत सक्रिय नहीं हुआ।
वरिष्ठ भाजपा नेता और क्षेत्रीय मंत्री अशोक तिवारी बताते हैं कि बनारस न केवल पूर्वांचल बल्कि उत्तर भारत का बड़ा केंद्र शुरू से रहा है। 2012 के चुनाव में शहर उत्तरी से 28 प्रत्याशी मैदान में थे और भाजपा प्रत्याशी रविंद्र जायसवाल को विजय मिली थी।
बसपा के सुजीत मौर्या दूसरे, सपा के अब्दुल शमद तीसरे और कांग्रेस के रबैया कलाम चौथे नंबर पर थे। इसके अलावा बाकी सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। ऐसे में विनय कुमार दूबे अपनी पहचान भी नहीं बना पाया था।