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बनारस का यह महल है बड़ा खास, यहां मिलता है ज्योतिष विज्ञान के साथ गंगा दर्शन का रोमांच
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 08 Mar 2018 02:03 PM IST
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maan mahal
- फोटो : अमर उजाला
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ज्योतिष विज्ञान को समझने के साथ ही गंगा दर्शन का रोमांच अनुभव करना हो तो बनारस में इससे उपयुक्त जगह कहीं और नहीं है। यहां हर रोज युवाओं के साथ साथ विदेशी पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या पहुंचती है। यह महल पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान वर्धन के सशक्त माध्यम के रूप में उभरा है। आगे की स्लाइड्स में जानिए ...
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बनारस के इस खास महल का नाम मान महल है। दिल्ली के जंतर मंतर की तरह यह महल वास्तव में एक वेधशाला है। यह स्थल पर्यटन के साथ-साथ ज्ञान वर्धन के सशक्त माध्यम के रूप में उभरा है। यहां आने वाले लोग मान महल में ज्योतिष विज्ञान का नायाब नमूना वेधशाला देखने पहुंच रहे हैं। साथ ही, गंगा और काशी पर आधारित दो इंटरप्रिटेशन सेंटर भी यहां खोले गए हैं।
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दशाश्वमेध घाट के ठीक बगल में स्थित है मान मंदिर महल। दिल्ली के जंतर मंतर की तरह यह महल वास्तव में एक वेधशाला है। मान मंदिर महल की खिड़कियों से गंगा की लहरों का नजारा भी लिया जा सकता है। मान मंदिर महल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से संरक्षित इकाई है। सूर्योदय और सूर्यास्त तक महल में प्रवेश किया जा सकता है।
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भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण की ओर से यहां आने वाले लोगों को भारत के गौरवमयी इतिहास से रूबरू कराया जाता है। यहां कियास्क मशीनों पर भी अलग-अलग भाषाओं में जानकारी मौजूद है। इस महल की खास बात यह है कि इसकी खिड़कियों से गंगा की छटा अद्भुत नजर आती है। भारतीय पर्यटकों के लिए 15 रुपये और विदेशियों के लिए 200 रुपये टिकट शुल्क रखा गया है।
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मान मंदिर के नाम से विख्यात इस महल का निर्माण राजस्थान के आमेर के राजा मान सिंह ने 1600 ईस्वी के आसपास कराया है। इसके बाद जयपुर के संस्थापक राजा सवाई जय सिंह द्वितीय (1699-1743) ने इस महल के छत पर वेधशाला का निर्माण कराया। सवाई जय सिंह की खगोल शास्त्र में खास रुचि थी इसलिए वाराणसी के अलावा दिल्ली, जयपुर, मथुरा और उज्जैन में सवाई जय सिंह ने ऐसी ही वेधशालाओं का निर्माण कराया।