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चार बेटों, बेटी और एक बहू की अमानवीय करतूत का ऐसे हुआ खुलासा, जानकर कहेंगे- उफ्फ!
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 24 May 2018 04:45 PM IST
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13 हजार रुपये पेंशन पाने वाली 80 वर्षीय वृद्धा की मौत इसी वर्ष जनवरी में हो गई लेकिन उसका अंतिम संस्कार आज तक नहीं किया गया। शव को केमिकल युक्त लेप लगाकर एसी वाले कमरे में रखा गया। पेंशन पाने की लालच में यह कृत्य वृद्धा के चार बेटों बेटी और एक बहू किया। मां और बच्चों के संबंध को तार-तार कर देने वाला अमानवीय मामला सामने आया धर्म और मर्म की नगरी काशी में। बुधवार को यह राज खुला तो लोग स्तब्ध तो हुए ही बेटों-बेटी को कोसते नहीं थके। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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तकरीबन चार माह दस दिन बाद बुधवार को दुर्गंध से आसपास के लोगों का जीना मुहाल हुआ तो सौ नंबर पर सूचना दी गई और पुलिस आई। वृद्धा के सड़े-गले शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने में पुलिस को चारों बेटों और बेटी के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। मामला वाराणसी के दुर्गाकुंड क्षेत्र के कबीर नगर स्थित आवास विकास कॉलोनी के चार मंजिला इमारत के भूतल पर बने फ्लैट का है।
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कबीर नगर की आवास विकास कॉलोनी की अमरावती देवी के फ्लैट का बिजली कनेक्शन यदि बीते हफ्ते न काटा जाता तो शायद उनकी मौत का राज इतनी जल्दी सामने नहीं आ पाता। दरअसल, बिजली कनेक्शन कटने से एसी चलना बंद हो गया था और अमरावती देवी के शव से बदबू उठना शुरू हुई। बुधवार को जब अमरावती देवी के घर से तकरीबन 25-30 फीट की दूरी पर खड़े लोगों को अजीब सी दुर्गंध आई तो शंकावश किसी ने सौ नंबर पर फोन किया और मामला सामने आया।
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कॉलोनी के लोगों ने बताया कि अमरावती देवी अपने बच्चों पर जान छिड़कती थी। कॉलोनी और आसपास के लोगों ने बताया कि 14 जनवरी को अमरावती देवी की मौत हुई तो अंतिम संस्कार के लिए पड़ोसी आगे आए। कुछेक लोगों ने कफन सहित अन्य सामग्रियों का इंतजाम भी किया लेकिन वृद्धा के बेटों-बेटी ने कहा कि उनकी मां का मस्तिष्क जिंदा है और वो जिंदा हैं। इसके बाद बेटों-बेटी ने पड़ोसियों, सब्जी और दूध वाले सहित किसी के भी घर आने पर प्रतिबंध लगा दिया था।
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यहां तक कि रिश्तेदारों को भी घर नहीं आने दिया जाता था। सभी का कहना रहता था कि मां गंभीर रूप से बीमार हैं और किसी की भी आवाजाही से उन्हें परेशानी होगी। वहीं, फ्लैट की बात की जाए तो जिस कमरे में अमरावती देवी का शव रखा था उसमें एसी लगा हुआ था। इसके अलावा घर में सही तरीके से खाने-पीने का सामान भी नहीं दिखा। 40 वर्ष से ज्यादा आयु के भाई-बहन बेरोजगारी के साथ ही विवाह न होने से भी अवसाद ग्रस्त प्रतीत हुए। वृद्धा का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया तो मौके पर कॉलोनी के लोगों और राहगीरों की भीड़ जुटी रही।