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गंगा दशहरा पर बना अद्भुत संयोग, काशी में उमड़ा श्रद्धालुओं का रेला, लगाई आस्था की डुबकी

Thu, 24 May 2018 02:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 24 May 2018 02:54 PM IST
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Ganga dussehra festival celebrated in varanasi
ganga - फोटो : अमर उजाला
पतित पावनी गंगा के अवतरण दिवस पर गुरुवार को शिव की नगरी काशी में उत्सव मनाया गया। इस बार योग विशेष का बाहुल्य होने से गंगा दशहरा के दिन स्नान, दान, जप, तप, व्रत और उपवास आदि करने के लिए काशी में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ पड़े।। अस्सी, दशाश्वमेध से लेकर राजघाट तक हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। गंगा के इस पार से लेकर उस पार तक मेले जैसा मंजर दिखाई दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें..


 
Ganga dussehra festival celebrated in varanasi
ganga

 गंगा दशहरा पर गर करण, वृषस्थ सूर्य, कन्या का चंद्र होने के कारण बेहद महाफलदायी बताया गया।  ज्येष्ठ शुक्ल दशमी गंगा दशहरा पर गुरुवार को पतित पावनी में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं की रेला उमड़ पड़ा। अस्सी से राजघाट के बीच गंगा के तटों पर तिल रखने की जगह नहीं बची। स्नान के बाद गरीबों को वस्त्र, अन्न का दान करने की होड़ मची थी। आरती-पूजा और अनुष्ठानों के जरिए गंगा की अविरता-निर्मलता के संकल्प दोहराए गए।

 
Ganga dussehra festival celebrated in varanasi
ganga - फोटो :
मान्यता है कि भगीरथ के तप के बाद कभी इसी तिथि पर गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। अवतरण दिवस पर गंगा का वेद की ऋचाओं से कहीं दुग्धाभिषेक तो कहीं महा आरती कर उत्सव मनाया गया। दशहरा पर काशी में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का अनुमान है।
 
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Ganga dussehra festival celebrated in varanasi
ganga - फोटो : twitter

बांधों, नहरों और नालों के चलते संकट के दौर से गुजर रही गंगा के प्रति श्रद्धाभाव में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। मध्यरात्रि के बाद से ही देश के कोने कोने स स्नानार्थियों की भीड़ गंगा किनारे पहुंचने लगी। दशाश्वमेध घाट से लगे चितरंजन पार्क में तो संतों, भक्तों के डेरे जहां-तहां पड़े हुए थे। 

 
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Ganga dussehra festival celebrated in varanasi
ganga - फोटो : ganga
भोर में ही घंट-घड़ियाल की गूंज के साथ स्नान आरंभ हो गया। घाट की सीढ़ियों पर कहीं महिलाएं दीपदान कर रही थीं तो कहीं समूहों में हल्दी-चंदन की अल्पनाएं बनाकर मंगल गीत गाए जा रहे थे। गंगा की लहरों पर भी दीये प्रज्ज्वलित कर उनके प्रति आस्था निवेदित की जा रही थी। 

 
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