संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का मुख्य भवन गुरुवार को 37वें दीक्षांत समारोह का साक्षी बना। ऐतिहासिक मुख्य भवन में मेधावियों को जब गोल्ड मेडल मिले तो सुनहरी आभा से उनके चेहरे दमक उठे। आचार्य परीक्षा में बेहतरीन अंक प्राप्त करने वाले 33 छात्रों को 59 पदक प्रदान किए गए। हालांकि, इस दौरान 26 मेधावी ही उपस्थित रहे। कुलाधिपति और प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और यूजीसी के उपाध्यक्ष प्रो. भूषण पटवर्धन के हाथों स्वर्ण पदक पाने के बाद उत्साहित विद्यार्थियों ने संस्कृत और समाज की सेवा के प्रति संकल्प को दोहराया। डीलिट की उपाधि पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री को दी गई। वहीं, संत स्वामी शरणानंद महामहोपाध्याय की उपाधि लेने नहीं पहुंचे।
संपूर्णानंद संस्कृत विवि दीक्षांत समारोह: संस्कृत में दोष आने से राष्ट्र पर आएगा संकट- राज्यपाल
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कुलाधिपति और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि आज की शिक्षा सिर्फ प्रमाण पत्र जुटाने वाली बन गई है। यह दोष संस्कृत की शिक्षा में नहीं आना चाहिए। संस्कृत में अगर यह दोष आ गया तो राष्ट्र संकट में पड़ सकता है। इसके लिए संस्कृत के विद्वानों और छात्रों को सतर्क रहना होगा। डॉ. संपूर्णानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत की। कुलाधिपति ने कहा कि संस्कृत भाषा का नहीं संपूर्ण भारतीय संस्कृति का अध्ययन है। संस्कृत वसुधैव कुटुंबकम् के साथ संपूर्ण विश्व को एकता के सूत्र में बांधती है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक संस्कृत ने भारत को एकता के सूत्र में पिरोया है।
उन्होंने संस्कृत भाषा की शुद्धता के लिए भाषा के विद्वानों और प्रतिभाशाली छात्रों को दायित्व बोध भी कराया। उन्होंने कहा कि छात्र व विद्वान स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा की अलख जगाने के साथ गरीब बच्चों को पढ़ाएं। संस्कृत भाषा के प्राचीन महत्व का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं के कारण इस देव भाषा की बड़ी उपेक्षा हुई। स्वतंत्रता के बाद भी इसे महत्व नहीं दिया गया, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार के प्रयास से भाषा का उत्थान हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की तकदीर और तस्वीर बदल रही है।
युवा ही लिखेंगे नए भारत की नई तकदीर
मेडल के रूप में मिले गोल्ड को असली पूंजी बताते हुए कुलाधिपति ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि दैनिक जीवन में कुछ समय सामाजिक सरोकारों के लिए भी जरूर निकालें। जब वह इससे जुड़ेंगे तो आत्म संतोष मिलेगा और नए भारत की तस्वीर साकार होगी। नए भारत की तकदीर युवा ही लिखेंगे। महिला सशक्तीकरण, उनके स्वावलंबन पर जोर देते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज को नजरिया बदलना चाहिए। आर्थिक, राजनीतिक, कानूनी मुद्दों के साथ उनके प्रति संवेदनशील बनकर कौशल विकास पर ध्यान देने की जरूरत है।
राज्यपाल ने दिलाए पांच संकल्प :
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के स्वच्छता और फिट इंडिया अभियान के साथ वर्ष 2025 तक देश को टीवी मुक्त बनाने के अभियान में जन भागीदारी पर जोर दिया। कुलाधिपति ने कहा कि शिक्षा सही मायने में तभी सार्थक होगी, जब छात्र पांच संकल्पों को अपने जीवन में उतारेंगे।