मुख्य अतिथि यूजीसी के वाइस चेयरमैन डॉ भूषण पटवर्धन ने कहा कि ने भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की क्षमता संस्कृत में ही है। संस्कत केवल भाषा ही नहीं भारत की संस्कृति है,क्योंकि यह स्पष्ट भी है कि यह भाषा ही सभी भारतीय भाषाओं की जननी है। इसलिए संस्कृत के विद्वानों और छात्रों की जिम्मेदारी है कि इसके विकास के लिए गंभीर प्रयास करें।
भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की क्षमता संस्कृत में ही: यूजीसी वाइस चेयरमैन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उक्त बातें उन्होंने दीक्षांत में डिग्री प्राप्त करने के बाद आपकी समाज के प्रति नई जिम्मेदारी का आरंभ हो रहा है इसे बेहतर तरीके से निभाएं। उक्त बातें वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 37वें दीक्षांत समारोह में कहीं। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा को प्रमाण पत्र तक ही सीमित न रखें इसे समाज सुधार में उपयोग करें। अन्य भाषाओं और शिक्षा पद्धति में आए दोषों को समझकर संस्कृत भाषा को इससे बचाए रखें।
दीक्षांत समारोह में तीन दशक के बाद महामहोपाध्याय की उपाधि स्वामी शरणानंद महाराज को दी गई। हालांकि उपाधि ग्रहण करने के लिए वह स्वयं नहीं उपस्थित थे। डी लिट की उपाधि विश्व में संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए कार्य करने वाले संस्कृत भारती के संस्थापक पद्मश्री चमूकृष्ण शास्त्री को दी गई। सर्वाधिक दस स्वर्ण पदक स्वामी अद्भुत वल्लभदास को दिए गए। इससे पूर्व दीप प्रज्वलन के बाद राष्ट्र गान और वैदिक मंगलाचरण के साथ दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ। समारोह में 33 छात्रों को 59 स्वर्ण पदक दिए गए। आचार्य की परीक्षा में सर्वोच्च अंक पाने वाले स्वामी अद्भुत वल्लभदास को 10 स्वर्ण पदक मिले। समारोह में 22726 विद्यार्थियों के बीच उपाधि वितरित हुई। मुख्य भवन में पांच सौ विद्यार्थियों और मेहमानों के बैठने की व्यवस्था की गई रही।
सात विद्वानों को मिल चुकी है महामहोपाध्याय की उपाधि
विश्वविद्यालय की ओर से महामहोपाध्याय की उपाधि 1989 में सात विद्वानों को दी गई थी। इसमें जीवन्यातीर्थ, युधिष्ठिर मीमांसक, पेरि सूर्यनारायण शास्त्री, पं. पीएन पट्टाभिराम शास्त्री, पं. केदार ओझा, एसआर कृष्णमूर्ति शास्त्री, रामचंद्र केशव डोंगरे शामिल हैं।
इन्हें मिले स्वर्ण पदक
स्वामी अद्भुत वल्लभ दास को 10, हरिओम शर्मा को 5, राहुल पांडेय को 4, प्रकाश पांडेय को 3, हरेन अस्वार को 3, पन्नू तिवारी को 2, टीका देवी को 2, वीरेंद्र कुमार शुक्ला को 2, सुमन तिवारी को 2, सूर्या प्रसाद पौडेल को 2, अश्विनी कुमार दुबे को 2 स्वर्ण पदक मिलेंगे।
जबकि लोकेश शृंगी, अंबुज त्रिवेदी, आलोक शुक्ल, कंचन पांडेय, हिमांशु शेखर त्रिपाठी, रसिक वल्लभ दास, पुष्पा केशरवानी, अच्युत, सुधांशु द्विवेदी, आशीष गडपाल, पत्रिका जैन, बबन कु मार मिश्र, अबिंकेश मिश्र, सतीशचंद्र प्रजापति, अमृतपंथी, श्रद्धा पांडेय, अजय कुमार मौर्य, प्रवीण कुमार मौर्य, प्रांजल कुमार मिश्र, प्रांशु शर्मा, दीनेश्वर धनराज को एक-एक स्वर्ण पदक मिले।