सातवें वेतन आयोग की मांग के लिए बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में रेजीडेंटों की हड़ताल तीसरे दिन बुधवार को जारी रही। सुबह से लेकर शाम तक तीन बार अधिकारियों से उनकी वार्ता भी हुई लेकिन कोई परिणाम नहीं निकल सका। रेजिडेंट शुक्रवार तक हड़ताल पर अड़े हैं, शनिवार से इमरजेंसी, आईसीयू और लेबर रूम में भी काम नहीं करने की चेतावनी दी है। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
बीएचयू अस्पताल और ट्रामा सेंटर में रेजिडेंट्स की जारी है हड़ताल, मरीजों के लिए बना जान का जवाल
बीएचयू चिकित्सा विज्ञान संस्थान के रेजीडेंट सोमवार से हड़ताल पर हैं। अब तक ट्रामा सेंटर से लेकर चिकित्सा विज्ञान संस्थान में कई बार बातचीत हो चुकी है, जिसमें कुलपति, आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक ने एमएचआरडी की ओर से जल्द कार्रवाई की बात भी कही लेकिन रेजिडेंट मानने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि तीन साल से केवल कागजी कार्रवाई ही हो रही है, कब से सातवां वेतन मिलेगा, कोई कुछ नहीं बता रहा है।बुधवार को भी सुबह आईएमएस में रेक्टर से लेकर निदेशक ने बातचीत की लेकिन नतीजा कुछ नहीं हुआ।
मरीजों और उनके परिजन काफी परेशान है। बिहार से आए अलाउद्दीन ने कहा कि पेट में बहुत दिनों से दर्द था। पिछले दिनों जांच कराया तो किडनी की बीमारी का पता चला। सुबह अस्पताल आ गए थे लेकिन पर्चा ही नहीं जमा हुआ। मोतिहारी से आए रामदिनेश कुमार ने कहा कि गले में संक्रमण से परेशान चल रहे थे। सोचा एकदम सुबह पर्चा कटाकर डॉक्टर को दिखा लेंगे लेकिन पर्चा जमा करने के बावजूद डॉक्टर नहीं देखे। गाजीपुर से आईं रेखा गौड़ ने कहा कि पति के पेट में दर्द था। सुबह 9 बजे से 1 बजे तक ओपीडी के बाहर पति को स्ट्रेचर पर रख कर खड़ी रही लेकिन किसी ने सुध नहीं ली। चंदौली सरे आईं सविता ने कहा कि पिछले महीने बिटिया की आंत का ऑपरेशन हुआ था। मंगलवार को फालोअप में देखने के लिए बुलाया गया था लेकिन हड़ताल की वजह से चार घंटे इंतजार करना पड़ा।
ओपीडी, जांच, ऑपरेशन का गिरा ग्राफ :
हड़ताल का असर यह रहा कि ओपीडी, जांच और ऑपरेशन की संख्या भी कम हो गई है। ओपीडी में पर्चा जमा करने के बाद मरीजों और तीमारदारों को डॉक्टर से मिलने के लिए काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। ओपीडी में रेजीडेंटों के रहने से जहां 200 से 300 मरीज देखे जाते थे, वहीं कई विभागों की ओपीडी 150 से 200 तक ही रह गई है। इसके अलावा जांच और ऑपरेशन का ग्राफ पिछले तीन दिन में तेजी से गिरा है। सोमवार और मंगलवार को जहां क्रमश: 83 और 40 ऑपरेशन हुए, वहीं बुधवार को 33 ऑपरेशन हो सके। इसके अलावा सोमवार को 3022 और मंगलवार को 2622 लोगों की जांच के सापेक्ष बुधवार को केवल 2122 लोगों की जांच हुई। इसके अलावा वार्डों में भर्ती मरीजों की संख्या में कमी आई है।
| पर्चा बिक्री ओपीडी | 2475 |
| ओपीडी में पंजीकरण | 3350 |
| वार्डों में भर्ती मरीज | 56 |
| डिस्चार्ज | 65 |
| इमरजेंसी ओपीडी | 46 |
| ऑपरेशन | 33 |
| कुल जांच | 2122 |