नई दिल्ली-वाराणसी के बीच बुलेट ट्रेन से बदलेगा पूर्वांचल, इन बिंदुओं से जानें
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पर्यावरण संरक्षण :
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHRCL) की ओर से भूमि अधिग्रहण के साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए भी व्यापक स्तर पर पहल की गई है। NHRCL वड़ोदरा, गुजरात में हाईस्पीड रेल कारीडोर के बीच में आने वाले पेड़ों को काटने के बजाय उनको नए स्थान पर रोप रही है। वृक्ष हो चुके पेड़ों को उस रूट पर काटने के बजाय जड़ सहित उनको सावधानीपूर्वक हटाकर नए जगहों पर पूरे वृक्ष को रोपा जा रहा है।
भारत-जापान सहयोग :
जापान के तत्कालीन पीएम शिंजो आबे के वाराणसी दौरे और गंगा आरती में शामिल होने के पूर्व ही भारत जापान में बुलेट ट्रेन संचालन को लेकर समझौता हो चुका था। वाराणसी आने के दौरान ही शहर के लोगों को अंदेशा हो गया था कि आने वाले दिनों में जापान के सहयोग से इस रूट पर भी बुलेट ट्रेन भविष्य में दौड़ेगी। उसी समय घोषित जापान के सहयोग से बन रहे रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर भारत और जापान के साझा सहयोग के केंद्र के तौर पर जाना जाता है।
बढ़ेगा रोजगार :
रूट पर बुलेट ट्रेन का सर्वे होने के बाद से लेकर इसको दौड़ाने तक रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इस उम्मीद के साथ ही मेगा परियोजनाएं भी पूर्वांचल में अब आकार पा रही हैं। रोप-वे से लेकर मेट्रो चलाने तक की संभावनाओं के बीच बुलेट ट्रेन पर सवार होकर रोजगार के अवसर भी यकीनन पूर्वांचल का रुख करेंगे और यहां का पिछड़ापन दूर होगा।
पर्यटन को बढ़ावा:
उत्तर प्रदेश की दो प्रमुख धर्म नगरी अयोध्या और काशी को वाराणसी-नई दिल्ली हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए जोड़ने का प्लान है। उम्मीद है कि इससे प्रयागराज और अयोध्या के विकास के साथ ही काशी में पर्यटन और धर्म आधारित गतिविधियों को गति मिलेगी। अयोध्या में एक ओर निर्माण जारी है तो दूसरी ओर काशी में कोरोना संक्रमण के बाद से ही मेगा परियोजनाओं को गति मिलने लगी है।