देश का एक आम इंसान सोचता है कि उसका बच्चा पढ़ लिख लेगा तो उसे नौकरी मिल जाएगी। नौकरी के बाद उसके घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी। इस उम्मीद में हर इंसान अपने बच्चों को पढ़ाता है। बच्चे भी पढ़ लिख कर नौकरी की तलाश में लग जाते है और परिवार के लिए नौकरी करते है। लेकिन इससे उलट गरीबी के बावजूद शहीद रमेश यादव के पिता ने अपने बेटे को देश की हिफाजत के लिए नौकरी करने को कहा। देखें आगे की स्लाइड्स में...
वाराणसी के तोफापुर गांव निवासी श्याम नारायण यादव का परिवार खेती पर आश्रित है। श्याम नारायण बताते हैं कि रमेश को पढ़ाने और सीआरपीएफ में भर्ती कराने के लिए उन्होंने घर के सामने की तीन बीघा जमीन पांच लाख रुपये में गिरवी रख दी थी। श्याम नारायण का मानना था कि बेटा सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा और परिवार की आर्थिक तंगी भी दूर हो जाएगी।
इस बार जब रमेश छुट्टी पर आए थे तो पिता से उन्होंने कहा था कि अबकी बार जब भी आएंगे तो गिरवी जमीन को छुड़ा लेंगे। पिता श्यामनारायण रोते हुए कह रहे थे कि लग रहा है शायद अब गिरवी रखी जमीन कभी मुक्त नहीं हो पाएगी। घर का खेवनहार तो बीच मंझधार में ही छोड़ कर अनंत यात्रा पर चला गया।
शहीद के घर भारतीय जीवन बीमा निगम की टीम सरकारी अधिकारियों से पहले पहुंच गई। शंकरपुर गांव के भारतीय जीवन बीमा के एजेंट ने सात अक्तूबर, 2017 को रमेश का पांच लाख रुपये का जीवन बीमा किया था। खबर मिलते ही पहड़िया की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक भावना कंकन व विकास अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने पहुंच कर कागजी कार्रवाई की। शुक्रवार शाम तक शहीद की पत्नी को 10 लाख रुपये का चेक दे दिया गया।
शहीद रमेश यादव के घर पहुंचे राज्यमंत्री अनिल राजभर ने कहा कि तोफापुर गांव की माटी के लाल का नाम देश सेवा के लिए अमिट हो गया। गम के इस माहौल में भी हमें गर्व है। शहीद परिवार की हर मदद के लिए सरकार तैयार है। रमेश के बड़े भाई राजेश को उन्होंने सैनिक कल्याण विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया।