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शहीद के पिता ने नौकरी के लिए गिरवी रखी थी जमीन, बेटे ने कहा था- अगली बार आकर जमीन छुड़ाऊंगा

Mon, 18 Feb 2019 10:18 AM IST
Vikas Kumar सत्येंद्र उपाध्याय,अमर उजाला,वाराणसी
सत्येंद्र उपाध्याय,अमर उजाला,वाराणसी Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 18 Feb 2019 10:18 AM IST
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Pulwama attack martyred ramesh yadav struggle story
- फोटो : amar ujala

देश का एक आम इंसान सोचता है कि उसका बच्चा पढ़ लिख लेगा तो उसे नौकरी मिल जाएगी। नौकरी के बाद उसके घर की आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी। इस उम्मीद में हर इंसान अपने बच्चों को पढ़ाता है। बच्चे भी पढ़ लिख कर नौकरी की तलाश में लग जाते है और परिवार के लिए नौकरी करते है। लेकिन इससे उलट गरीबी के बावजूद शहीद रमेश यादव के पिता ने अपने बेटे को देश की हिफाजत के लिए नौकरी करने को कहा। देखें आगे की स्लाइड्स में...

Pulwama attack martyred ramesh yadav struggle story
- फोटो : amar ujala

वाराणसी के तोफापुर गांव निवासी श्याम नारायण यादव का परिवार खेती पर आश्रित है। श्याम नारायण बताते हैं कि रमेश को पढ़ाने और सीआरपीएफ में भर्ती कराने के लिए उन्होंने घर के सामने की तीन बीघा जमीन पांच लाख रुपये में गिरवी रख दी थी। श्याम नारायण का मानना था कि बेटा सीआरपीएफ में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा और परिवार की आर्थिक तंगी भी दूर हो जाएगी।

Pulwama attack martyred ramesh yadav struggle story
- फोटो : amar ujala

इस बार जब रमेश छुट्टी पर आए थे तो पिता से उन्होंने कहा था कि अबकी बार जब भी आएंगे तो गिरवी जमीन को छुड़ा लेंगे। पिता श्यामनारायण रोते हुए कह रहे थे कि लग रहा है शायद अब गिरवी रखी जमीन कभी मुक्त नहीं हो पाएगी। घर का खेवनहार तो बीच मंझधार में ही छोड़ कर अनंत यात्रा पर चला गया।

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Pulwama attack martyred ramesh yadav struggle story
- फोटो : amar ujala

शहीद के घर भारतीय जीवन बीमा निगम की टीम सरकारी अधिकारियों से पहले पहुंच गई। शंकरपुर गांव के भारतीय जीवन बीमा के एजेंट ने सात अक्तूबर, 2017 को रमेश का पांच लाख रुपये का जीवन बीमा किया था। खबर मिलते ही पहड़िया की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक भावना कंकन व विकास अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने पहुंच कर कागजी कार्रवाई की। शुक्रवार शाम तक शहीद की पत्नी को 10 लाख रुपये का चेक दे दिया गया।

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- फोटो : amar ujala

शहीद रमेश यादव के घर पहुंचे राज्यमंत्री अनिल राजभर ने कहा कि तोफापुर गांव की माटी के लाल का नाम देश सेवा के लिए अमिट हो गया। गम के इस माहौल में भी हमें गर्व है। शहीद परिवार की हर मदद के लिए सरकार तैयार है। रमेश के बड़े भाई राजेश को उन्होंने सैनिक कल्याण विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया।

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