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परमवीर चक्र विजेता का शहादत दिवस आज, एक जांबाज जिसने पाकिस्तानी टैंको को बनाया कब्रिस्तान
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Mon, 10 Sep 2018 04:14 PM IST
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Veer Abdul Hamid
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया का हर युद्ध हार-जीत के साथ ही अपने पीछे उन सैनिकों की कहानियां भी छोड़ जाता है जिसे सुनने के लिए वे हमारे बीच मौजूद नहीं रहते। वीर अब्दुल हमीद भारत के ऐसे ही शूरवीरों में से एक थे जिनके बलिदान की कहानी आज हमें प्रेरणा देती है। वीर अब्दुल हमीद यूपी के अकेले ऐसे शहीद हैं, जिन्हें सर्वोच्च सैनिक सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। आज उनके 53वें शहादत दिवस पर उनकी जन्म स्थली गाजीपुर जिले के धामूपुर में उनकी माटी को नमन करने देश की विभिन्न हस्तियां पहुंची है। 1965 के युद्ध का जिक्र आते ही अब्दुल हमीद की वीरता का जिक्र जरूर आता है। भारत के इस वीर सपूत ने अपनी वीरता के बल पर पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया था । महज 32 साल की उम्र के इस नौजवान ने पाकिस्तान से हुए इस युद्ध में कैसे तोड़ी पाकिस्तानी सेना की कमर, देखिए तस्वीरों में-
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- फोटो : amar ujala
1965 में जब पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया तो भारत के वीर सपूतों ने मोर्चा संभाला। आठ सितंबर की रात अब्दुल हमीद पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। इसी मोर्चे पर पाकिस्तान ने अपने अपराजेय माने जाने वाले टैंक अमेरिकन पैटन को लड़ाई में उतारा। पाक के इन टैंकों ने खेमकरण सेक्टर में हमला कर दिया। देश के वीर सपूत अब्दुल हमीद ने भी भारतीय सैनिकों के साथ मोर्चा संभाला। अब्दुल हामीद के पास बुलंद हौंसलों के सिवाए कोई हथियार नहीं था।
Veer Abdul Hamid
- फोटो : अमर उजाला
हामीद बिना अपनी जान की परवाह किए पाकिस्तानी टैंकों के सामने खड़े हो गए। उस वक्त उनके पास सिर्फ गन माउनटेड जीप थी। उन्होंने अपने अनुभव से पाक टैंकों की कमजोरी का पता लगा लिया।हमीद ने अकेले ही पाकिस्तान के 7 टैंकों को ध्वस्त कर दिया। हामीद और उनके साथियों के हौसले के सामने पाक सैनिक ज्यादा देर तक टिक नहीं पाए और वापस लौटने को मजबूर हो गए। वीर हामीद यहां भी नहीं रुके, वो वापस भाग रहे पाक सैनिकों का पीछा करने लगे।
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इसी दौरान उनकी जीप पर एक बम का गोला आ गिरा। इसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। 10 सितंबर को वे शहीद हो गए। सरकार ने अब्दुल हामीद की वीरता को सलाम करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र और फिर सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा। 1965 के युद्ध के दौरान अब्दुल हमीद के साहसिक योगदान के कारण मोर्चे पर भारतीय सेना के मनोबल में बहुत बढ़ोतरी हुई । हमीद की शहादत के बाद उनकी पोस्ट पर भारतीय सैनिकों ने मोर्चा लेते हुए पाकिस्तान के कई और टैंकों को ध्वस्त कर दिय़ा था ।
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पाकिस्तान को अपने पैंटन टैंकों पर बड़ा नाज था। ये टैंक सब कुछ रौंदते हुए भारत की सीमा में घुसते जा रहे थे। यह देख अब्दुल हमीद अपने साथियों के साथ ललकारते हुए आगे बढ़े। उनकी एंटी टैंक बंदूकों ने आग उगलना शुरु किया और देखते ही देखते तीन टैंक क्षण भर में ध्वस्त हो गए, जिससे पाकिस्तानी हमलावरों को मुंह की खानी पड़ी। सीने में गोली लगने से वीर अब्दुल हमीद वीरगति को प्राप्त हो गए। इस वीर सपूत का नाम आज भी पूरा देश आदर के साथ लेता है।