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काशी के कर्दमेश्वर महादेव में यह करने पर उम्र बढ़ने की है मान्यता, जानें मंदिर का इतिहास
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 13 Feb 2018 10:33 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित कंदवा पोखरे के किनारे स्थित कर्दमेश्वर महादेव के मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से दर्शनार्थी आते हैं। महाशिवरात्रि के एक दिन पहले निकलने वाली पंचक्रोशी की यात्रा के दौरान दर्शनार्थियों का रेला उमड़ पड़ता है। आगे की स्लाइड्स देखें...
महाशिवरात्रि
- फोटो : amar ujala
कर्दम ऋषि ने मंदिर में शिवलिंग की स्थापना की थी इसके कारण ही इसका नाम कर्दमेश्वर महादेव पड़ा। चंदेल वंशीय राजाओं ने मंदिर का निर्माण कराया था। मान्यता है कि कर्दम ऋषि के बनवाए गए कूप में जिसकी छाया दिख जाती है उसकी उम्र लंबी हो जाती है।
महाशिवरात्रि
कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी मुन्नू गिरी ने बताया कि कर्दम ऋषि ने यहां कई हजार सालों तक तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने वरदान मांगने को कहा। ऋषि ने पुत्र रत्न की मांग की। ऋषि ने कर्दम कूप का निर्माण कराया और उस पानी में अपनी पत्नी देहुति के साथ स्नान किया। किवदंतियों के अनुसार स्नान के बाद दोनों पति-पत्नी युवा हो गए। दंपती से कपिल मुनी उत्पन्न हुए।
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- फोटो : अमर उजाला
कपिल मुनी ने अपने पिता को सांख्य दर्शन का उपदेश दिया। तपस्या के दौरान कर्दम ऋषि की आंखों से आंसू निकले थे और कर्दम तीर्थ बन गया। काशी विश्वनाथ मंदिर से पहले ही इस मंदिर की स्थापना हुई है।
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शिव बाल रूप
- फोटो : shiv mahadev
कर्दम के पुत्र कर्दमी ने एक शिवलिंग स्थापित कर पांच हजार वर्षों तक अत्यंत कठोर तप किया। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें प्रत्येक स्रोत का स्वामी घोषित किया। एक अन्य वरदान में शिव ने कहा कि मणिकर्णेश के दक्षिण-पश्चिम स्थित जो लिंग है वह वरुणेश के नाम से जाना जाएगा।