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वाराणसी: भारत-नेपाल की मैत्री के रूप नेपाली मंदिर पर संकट, बारिश से ढह सकती हैं दीवारें

Fri, 21 May 2021 11:06 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 21 May 2021 11:06 AM IST
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Nepali pashupatinath mandir wall can be collapse due to rain in varanasi
नेपाली मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

भारत और नेपाल की मैत्री के प्रतीक रूप में वाराणसी में स्थापित नेपाली मंदिर की दीवारें कभी भी ढह सकती हैं। बीती रात हुई बरसात ने मंदिर व आश्रम में रहने वालों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। मंदिर के चारों तरफ खोदे गए गड्ढों में बरसात का पानी भरने से मंदिर के क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। गुरुवार की सुबह ललिता घाट स्थित नेपाली मंदिर में रहने वालों की जब आंखें खुलीं तो वह सहम गए। मंदिर के चारों तरफ खोदे गए 10 से 30 फीट के गड्ढों में बरसात का पानी भरा था और मंदिर की दीवार से सटी मिट्टी भी दरकनी शुरू हो गई थी। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के लिए मंदिर के चारों तरफ काफी गहरे गड्ढे खोदकर छोड़ दिए गए हैं। निर्माण कार्य के दौरान मशीनों के दबाव से मंदिर की दीवारों में पहले से ही दरार पड़ी हुई है। छह महीने से ललिता घाट पर भारी मशीनों से काम चल रहा है। इसके कारण लकड़ी से निर्मित मंदिर व आश्रम की दीवारों में कंपन होता है। सबसे ज्यादा खराब हालत मंदिर के वृद्धाश्रम की है। वृद्धाश्रम में रहने वाली महिलाओं को रात-दिन मंदिर की दीवारों के गिरने का डर बना हुआ है। देखें अगली स्लाइड्स...।

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मंदिर के आसपास गड्ढों में भरा पानी। - फोटो : अमर उजाला।

आश्रम की तरफ तो गड्ढों की गहराई 40 फीट से भी ज्यादा है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि समय रहते इसको दुरुस्त नहीं किया गया तो भारी बरसात से आश्रम व मंदिर के ध्वस्त होने का खतरा बना हुआ है। रात भर अगर बरसात हुई तो मंदिर पूरी तरह से ढह जाएगा। नेपाली मंदिर के महासचिव डॉ. गोपाल प्रसाद अधिकारी ने जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा व मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार वर्मा को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद मंदिर के आसपास भरे हुए पानी को निकालने का काम शुरू हुआ।

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दरक रही हैं अब मंदिर की दीवारें
महासचिव डॉ. गोपाल प्रसाद अधिकारी ने बताया कि नेपाली मंदिर की दीवारें पिछले छह महीने से लगातार दरक रही हैं। बरसात होने से खतरा और बढ़ गया है। बरसात ज्यादा हुई तो मंदिर व आश्रम ध्वस्त हो सकता है। इसके संरक्षण के लिए नेपाल सरकार को पत्र लिखा गया था लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण पुरातत्व विभाग की टीम नहीं आ सकी। दीवारों की खस्ता हालत को देखते हुए मंदिर की धर्मशाला को खाली करा दिया गया है। नेपाल सरकार से मंदिर के संरक्षण लिए पत्र लिखा गया है।

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ललिता घाट पर बना पशुपति नाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

नेपालियों की आस्था का है प्रमुख केंद्र
नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर का प्रतिरूप इस मंदिर में प्रवेश के बाद काशी में ही नेपाल का अहसास होता है। काशी में स्थित पशुपति नाथ का ये मंदिर नेपाली मंदिर के नाम से भी मशहूर है। मंदिर को लकड़ियों से ही निर्मित किया गया है। मंदिर के संरक्षण का काम भी नेपाल सरकार ही करती है। विश्वनाथ कॉरिडोर के पहले पाथवे के प्रवेश द्वार जलासेन घाट के बगल में स्थित भगवान पशुपति का मंदिर नेपालियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

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नेपाल के राजा ने करवाया था मंदिर का निर्माण
गंगा किनारे ललिता घाट पर पशुपतिनाथ मंदिर का निर्माण नेपाल के राजा राणा बहादुर शाह ने करवाया था। इसी दौरान 1806 में उनकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उनके बेटे राजा राजेन्द्र वीर विक्रम शाह ने इस मंदिर का निर्माण 1843 में पूरा कराया। मंदिर का निर्माण नेपाल से आए कारीगरों ने किया था। मंदिर निर्माण में प्रयोग की गई लकड़ी को भी राजा ने नेपाल से ही मंगवाया था।

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