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शिव की नगरी में कल से शक्ति की आराधना, अभिमंत्रित जल से होगी कलश स्थापना
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 20 Sep 2017 07:03 PM IST
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maa durga worship
- फोटो : maa durga worship
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शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति स्वरूपा की नौ दिवसीय आराधना काशी में आस्था के ऊंचे मानकों पर स्थापित होगी। देशभर में काशी इकलौती नगरी है जहां नौ गौरी और नौ दुर्गा के अलग-अलग धाम नवरात्र में सनातनधर्मियों की श्रद्धा का केंद्र बन जाते हैं। गुरुवार से आरंभ हो रहे शारदीय नवरात्र में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ की नौ गौरी के पीठों के दर्शन -पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ेगा। आगे की स्लाइड्स में देखें नौ दुर्गा दर्शन ..
navratri, durga puja
- फोटो : navratri, durga puja
आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी गुरुवार को हस्त नक्षत्र में महिषासुर मर्दिनी का आवाहन होगा। अभिमंत्रित गंगा जल से भरे कलशों में सविधि आवाहन के साथ देवी की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। मंदिरों में शारदीय नवरात्र की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कलश स्थापना के साथ जगत जननी जगदंबा की नौ दिवसीय शक्ति आराधना आरंभ होगी।
नौ दुर्गा दर्शन
दुर्गा पूजा
शैलपुत्री
प्रथम स्थान देवी शैलपुत्री का है। शास्त्रों के अनुसार देवी शैलपुत्री में काल का नाश करने की क्षमता है। देवी के जन्म के कारण विशाल शैल बने। इसी वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना का मुख्य मंत्र है-कालरात्रिम ब्रह्मास्तु वैष्णवी स्कंदमाता, सरस्वती मर्दति दक्ष दुहितरं नमाम: पावनां शिवाम्...। देवी शैलपुत्री का मंदिर वरुणा नदी के किनारे शैलपुत्री मुहल्ले में है। इनके नाम पर ही यह मुहल्ला बसा है।
प्रथम स्थान देवी शैलपुत्री का है। शास्त्रों के अनुसार देवी शैलपुत्री में काल का नाश करने की क्षमता है। देवी के जन्म के कारण विशाल शैल बने। इसी वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना का मुख्य मंत्र है-कालरात्रिम ब्रह्मास्तु वैष्णवी स्कंदमाता, सरस्वती मर्दति दक्ष दुहितरं नमाम: पावनां शिवाम्...। देवी शैलपुत्री का मंदिर वरुणा नदी के किनारे शैलपुत्री मुहल्ले में है। इनके नाम पर ही यह मुहल्ला बसा है।
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maa durga
- फोटो : maa durga
ब्रह्मचारिणी
इस मंत्र से दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है। मान्यता है कि देवी हिमवान के घर पुत्री बनकर उत्पन्न हुई थीं। नारद के उपदेशों से प्रभावित होकर उन्होंने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। पृथ्वी पर गिरे बेलपत्र खाकर तीन हजार साल व्यतीत किए। बेलपत्र का त्याग भी कर दिया तो भी उनका नाम अर्पणा पड़ गया। काशी में देवी का मंदिर दुर्गाघाट स्थित भवन संख्या 22/1 में प्रतिष्ठित है।
इस मंत्र से दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है। मान्यता है कि देवी हिमवान के घर पुत्री बनकर उत्पन्न हुई थीं। नारद के उपदेशों से प्रभावित होकर उन्होंने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। पृथ्वी पर गिरे बेलपत्र खाकर तीन हजार साल व्यतीत किए। बेलपत्र का त्याग भी कर दिया तो भी उनका नाम अर्पणा पड़ गया। काशी में देवी का मंदिर दुर्गाघाट स्थित भवन संख्या 22/1 में प्रतिष्ठित है।
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durga puja, navratri
- फोटो : durga puja, navratri
चंद्रघंटा
तृतीया को देवी चंद्रघंटा की आराधना होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जगत जननी जगदंबा का तीसरा रूप चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है। देवासुर संग्राम के दौरान माता चंद्रघंटा ने अपने घंटे से ही असुरों का दमन किया था। चंद्रमा शीतलता, शांति और घंटा नाद का प्रतीक है। घंटे के नाद से आसुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करने वाली देवी चंद्रघंटा भगवान शिव की ही शक्ति हैं। वाराणसी में इनका मंदिर चौक के पास ठठेरी गली से होकर चंद्रघंटा गली में है।
तृतीया को देवी चंद्रघंटा की आराधना होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जगत जननी जगदंबा का तीसरा रूप चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है। देवासुर संग्राम के दौरान माता चंद्रघंटा ने अपने घंटे से ही असुरों का दमन किया था। चंद्रमा शीतलता, शांति और घंटा नाद का प्रतीक है। घंटे के नाद से आसुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करने वाली देवी चंद्रघंटा भगवान शिव की ही शक्ति हैं। वाराणसी में इनका मंदिर चौक के पास ठठेरी गली से होकर चंद्रघंटा गली में है।