ज्यों ज्यों दवा की मर्ज बढ़ता गया...। यह कहावत काशी में गंगा निर्मलीकरण के उपायों पर चरितार्थ हो रही है। 25 हजार करोड़ रुपये की नमामि गंगे परियोजना को पलीता लगा दिया गया है। आगे की स्लाइड्स में जानें परियोजना का हाल...
2 of 8
बंद होने की बजाए गंगा में गिरने वाले नालों की संख्या बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
जिस दशाश्वमेध घाट पर डुबकी लगाने से दस अश्वमेश यज्ञ के बराबर पुण्य मिलने का महात्म्य है, वहां अब बजबजाते नाले की धार से दुर्गंध उठ रही है। पहले से गंगा में गिरने वाले 23 नालों की संख्या बढ़कर अब 49 हो गई है। हद तो यह है कि घाट से लेकर शहर तक का कूड़ा निस्तारण भी चोरी छिपे गंगा पार रेती पर या फिर किनारों पर ही करा के निगम के अफसर कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहे हैं।
3 of 8
बंद होने की बजाए गंगा में गिरने वाले नालों की संख्या बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
इसी पखवारे मकर संक्रांति पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का रेला गंगा में मकर स्नान के लिए उमड़ेगा और पुण्य का गोता उसी नाले के ठहरे पानी में करने के लिए तीर्थयात्री मजबूर होंगे। आंकड़ो के मुताबिक, 60 करोड़ लीटर गंदे पानी का भार रोज गंगा वहन कर रही है।
4 of 8
बंद होने की बजाए गंगा में गिरने वाले नालों की संख्या बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
काशी में गंगा निर्मलीकरण के लिए केंद्र सरकार ने जितनी दवा की, प्रदूषण की बीमारी उतनी ही बढ़ती जा रही है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, सीवेज पंपिंग स्टेशन, कूड़ा निस्तारण और नालों को बंद करने के नाम पर काशी में दो हजार करोड़ रुपये से अधिक पहले ही खर्च हो चुके हैं।
5 of 8
बंद होने की बजाए गंगा में गिरने वाले नालों की संख्या बढ़ी
- फोटो : अमर उजाला
अब नमामि गंगे परियोजना लागू होने के बाद नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा की ओर से एक बूंद भी गंदा पानी गंगा में न जाने देने की हिदायत तो दी गई लेकिन इसका नतीजा शून्य ही रहा। पहले से बह रहे 23 नालों को तो बंद नहीं किया जा सका, अलबत्ता अब 49 नाले गंगा में बहने लगे हैं।