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गोरक्षा, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम बांट रहे मोहम्मद फैज
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Mon, 30 Oct 2017 03:31 PM IST
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faiz khan
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सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर की नौकरी छोड़ मोहम्मद फैज खान गोरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने गोरक्षा, इंसानियत एवं भाईचारे का संदेश लेकर 12 हजार किमी निकाली है जो काशी पहुंच चुकी है। आगे की स्लाइड्स में जानिए इनके बारे में...
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मोहम्मद फैज खान ने गोरक्षा यात्रा 24 जून को लेह-लद्दाख से शुरू की थी। रविवार को यह यात्रा धर्मनगरी वाराणसी पहुंची। यहां फैज मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से अन्नपूर्णा नगर कॉलोनी में आयोजित गोसेवा एवं राष्ट्रीय सद्भावना पर व्याख्यान भी दिया।
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उन्होंने कहा कि गाय बचेगी तभी इंसानियत और संस्कृति बचेगी। कहा कि गाय की सेवा से देश मजबूत होगा और इंसानियत को बल मिलेगा। यहां गोरक्षा क्रांति जनजागरण यात्रा पर निकले मोहम्मद फैज खान का भव्य स्वागत किया गया। मोहम्मद फैज ने उपस्थित लोगों को गोरक्षा का संकल्प दिलाया।
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मोहम्म्द फैज खान रायपुर के रहने वाले हैं। इनकी पहचान आज की तारीख में बड़े गोकथा वाचक के रूप में हैं।इनके माता पिता शिक्षक हैं। फैज ने खुद राजनीति विज्ञान से डबल एमए किया है। चार साल पहले वह रायपुर में प्रोफेसर थे।
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गंगातीरी गाय
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एक उपन्यास में गाय की आत्मकथा से प्रेरित हो कर इन्होंने गोसेवा करना शुरू कर दिया। वह गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने को लेकर दिल्ली में अनशन भी कर चुके हैं।