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मौनी अमावस्या 2024: काशी में सवा चार लाख श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी, भक्तों का उमड़ा रेला, तस्वीरें

Fri, 09 Feb 2024 11:24 AM IST
प्रगति चंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 09 Feb 2024 11:24 AM IST
सार

Mauni Amavasya 2024: मौनी अमावस्या पर काशी में भक्तों का रेला उमड़ा है। गंगा घाटों पर स्नान-दान करने के साथ ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन का सिलसिला भोर से जारी है। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में लगाई डुबकी लगाई। 

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Mauni Amavasya 2024 devotees dip in Ganga in Kashi on Mauni Amavasya see latest pictures
Mauni Amavasya 2024 - फोटो : उज्ज्वल गुप्ता

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्रों की परंपरा गौरवशाली रही है। ब्रिटिश शासनकाल में भारतीयों की ओर से स्थापित यह पहला आधुनिक विश्वविद्यालय था। भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री और चंद्रशेखर आजाद से शुरू हुई यशस्वी स्नातकों की शृंखला आज भी जारी है। वर्तमान में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र भी इसी विश्वविद्यालय के पुरातन छात्र रहे हैं। आज विश्वविद्यालय अपनी स्थापना का 103वां समारोह मनाने जा रहा है। असहयोग आंदोलन के दौरान 10 फरवरी 1921 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने विद्यापीठ की नींव में पहली ईंट रखी थी। इसके 73 साल बाद 11 जुलाई


Mauni Amavasya 2024 devotees dip in Ganga in Kashi on Mauni Amavasya see latest pictures
Mauni Amavasya 2024 - फोटो : उज्ज्वल गुप्ता

शिक्षकों में भारत रत्न डॉ. भगवान दास, समाजवादी चिंतक आचार्य नरेंद्र देव, श्रीप्रकाश, आचार्य बीरबल, पूर्व सीएम डॉ. संपूर्णानंद, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल रघुकुल तिलक शामिल थे। संचालन कमेटी में मुंशी प्रेमचंद, पं. जवाहर लाल नेहरू, पुरुषोतम दास टंडन, लाला लाजपत राय, जमुनालाल बजाज, दामोदर जोशी और कृष्णकांत मालवीय थे। पुरातन छात्रों में भारत रत्न पं. लाल बहादुर शास्त्री, चंद्रशेखर आजाद, अभिनेता सुजीत कुमार, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े, प्रो. राजाराम शास्त्री शामिल हैं।
मौनी अमावस्या आज : वाराणसी में गंगा के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़, लोग लगा रहे हैं आस्था की डुबकी 

Mauni Amavasya 2024 devotees dip in Ganga in Kashi on Mauni Amavasya see latest pictures
Mauni Amavasya 2024 - फोटो : उज्ज्वल गुप्ता

स्वतंत्रता संग्राम में काशी विद्यापीठ का था योगदान
आजादी की लड़ाई में सहयोग के भाव से स्थापित काशी विद्यापीठ का स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान था। चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी काशी प्रवास के दौरान यहीं पर छिपकर रणनीति बनाते थे। वहीं बापू ने भी यहां पर सूत काता था।

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Mauni Amavasya 2024 - फोटो : उज्ज्वल गुप्ता
राष्ट्ररत्न ने दी थी जमीन और 10 लाख रुपये
राष्ट्ररत्न बाबू शिव प्रसाद गुप्त ने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि और 10 लाख रुपये देकर श्री हर प्रसाद शिक्षा निधि की स्थापना की। जुलाई 1963 में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मानद विश्वविद्यालय घोषित किया गया। 15 जनवरी 1975 से इसे चार्टर्ड विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया गया। तभी से इसे राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा भी प्राप्त है।
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Mauni Amavasya 2024 - फोटो : उज्ज्वल गुप्ता
काशी विद्यापीठ देश के लिए एक धरोहर है। सौ सालों का इतिहास समेटे हुए इस विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिलाने की पहल की जा रही है। 103वें स्थापना दिवस समारोह पर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही शोभायात्रा निकाली जाएगी। -प्रो. एके त्यागी, कुलपति, काशी विद्यापीठ
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