मकर संक्रांति पर पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। स्नान-दान और अनुष्ठान के बाद अन्न का भोग लगाया। शूलटंकेश्वर से लेकर कैथी तक 100 से ज्यादा घाटों पर श्रद्धालुओं का संगम नजर आया। उधर, विश्वनाथ मंदिर में दो लाख से ज्यादा भक्तों ने दर्शन किए।
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पतंगबाजी करते युवा
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भोग आरती में खिचड़ी, तहरी, तिलकुट, पापड़, दही, चूड़े का बाबा को भोग लगा और दस हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं को खिचड़ी का प्रसाद दिया गया। मंगलवार को सुबह 6:46 स्नान का मुहूर्त शुरू होने से पहले ही दो लाख भक्तों ने गंगा स्नान कर लिया था।
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Makar Sankranti 2025
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अर्धरात्रि के दो बजे से ही करीब 8-10 डिग्री तापमान पर अस्सी-दशाश्वमेध से लेकर पंचगंगा और राजघाट तक श्रद्धालु उमड़े थे। भोर में आठ डिग्री तापमान, घने कोहरे और 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही पछुआ हवा भी श्रद्धालुओं को गंगा घाटों पर स्नान करने से नहीं रोक पाई।
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मकर संक्रांति 2025
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दशाश्वमेध घाट पर पूरे देश-दुनिया भर से आए भक्तों ने गंगा स्नान किया। सूर्य नमस्कार करने के बाद भक्त जल लेकर विश्वनाथ बाबा के दर्शन के लिए कतारबद्ध हो गए। करीब 3-4 घंटे में भक्तों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन हुए।
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पतंगबाजी करते युवा
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इस दौरान भक्तों को घाटों की सीढि़यों, सड़कों और जिग-जैग पर 4-5 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। उधर, घरों से दही-चूड़ा और लाई-गट्टा खाकर निकले आम शहरियों ने पूरा दिन पतंगबाजी और गंगा में बोटिंग में बीता दिया। पतंगबाजी सड़कों के बजाय मैदानों और छतों पर ही दिखाई दी। आईआईटी-बीएचयू के एडीवी ग्राउंड पर दो घंटे की पतंगबाजी प्रतिस्पर्धा हुई।