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यहां दुल्हन टकली है, उग आती हैं उसकी मूंछें..., यह देख छूटी हंसी, देखें तस्वीरें

Tue, 03 Apr 2018 10:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Tue, 03 Apr 2018 10:33 AM IST
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Mahamurkh mela organise at rajendra prasad ghat in varanasi
Mahamurkh mela - फोटो : अमर उजाला
काशी के राजेंद्र प्रसाद घाट पर महामूर्ख मेले में विचित्र विवाह के लोग साक्षी बने। शनिवार गोष्ठी की ओर से आयोजित महामूर्ख मेले के स्वर्ण जयंती समारोह में देर रात तक हंसी के हंसगुल्ले छूटते रहे। आगे की स्लाइड्स में देखें...


 
Mahamurkh mela organise at rajendra prasad ghat in varanasi
Mahamurkh mela - फोटो : अमर उजाला
विवाह ही मानव जीवन की सबसे बड़ी मूर्खता है को ध्यान में रखते हुए ज्योतिषाचार्य डा. लक्ष्मण दास को दुल्हन और पत्नी पूनम दास को दूल्हा बनाकर बेढंगे मंत्रोच्चार से विवाह संपन्न कराया गया। विवाह के ठीक बाद ही छुट्टा-छुट्टी की नौबत आ पड़ी। दूल्हे ने यह कहते हुए निभाने से इंकार कर दिया कि दुल्हन टकली है और उसकी मूंछे उग आती हैं। इस मामले में किसी तरह सुलह कराकर दोनों को वर्ष भर साथ रहने के लिए राजी किया गया। '

 
Mahamurkh mela organise at rajendra prasad ghat in varanasi
Maha Murkh Mela - फोटो : अमर उजाला
रविवार को राजेंद्र प्रसाद घाट पर कार्यक्रम की शुरूआत से पूर्व तीन बार गर्दभ ध्वनि से आयोजन के ईष्टदेव का आह्वान हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. दीपक मधोक ने गर्दभ राजा की आरती उतारकर महामूर्ख मेले का श्रीगणेश किया। इसके बाद हास्य कवियों की कविताओं का पाठ आरंभ हुआ। 

 
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Mahamurkh mela organise at rajendra prasad ghat in varanasi
Mahamurkh mela - फोटो : अमर उजाला
सुदामा तिवारी सांड़ बनारसी ने गंगा की सफाई पर खर्च हुए लाखों लाख..., झगड़ू भैया ने हम जोगी से कहलीं सरकार का करिहें गंगा माई...,विजेंद्र मिश्र दमदार बनारसी ने मोबाइल युग पर व्यंग्य करते हुए बीत गया भोजपत्र और लेखनी का युग...सुनाया। इसके बाद डंडा बनारसी ने राजनीति पर व्यंग्य करते हुए मेरा साला बहुत काला सड़क का घूर लगता है...सुनाया तो श्रोता अपने ठहाके नहीं रोक सके। 

 
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Mahamurkh mela organise at rajendra prasad ghat in varanasi
Mahamurkh mela - फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के गुरु सक्सेना ने हाथों में हाथ मिल के हथकंडे बदल गए..., देवरिया के बादशाह प्रेमी ने इक्कीसवीं सदी का देखिए ये नजारा..., दिल्ली के विनीत पांडेय ने फूल बनकर महक जाए जिंदगी..., राजस्थान के बृजेंद्र चकोर ने रूखा सूखा छोड़ सब चिकनी चुपड़ी भाएगी...सुनाया तो पूरा घोड़ा घाट हास्य के फव्वारों से गूंज उठा। फक्कड़ गाजीपुरी ने लगता है अमृत जल को अब जहर बनाकर छोड़ेंगे..., डा. धर्मप्रकाश मिश्र ने दुखियारी गंगा जी बोली मैं फंस गई राम जी...,इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी ने जो हैं पढ़े लिखे वो सब हैं संतरी बनें...और प्रतापगढ़ के दिनेश सिंह ने पत्नी ने पूछा जी ये विश्वासघात कैसा होता है..जो तेरे बाप ने किया बस वैसा ही होता है सुनाकर खूब हंसी ठिठोली की। 

 
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