आम चुनाव के दौरान भाजपा पर जुबानी हमला आखिरकार अंतिम चरण के चुनाव के बाद ओम प्रकाश राजभर को भारी पड़ ही गया। रविवार की देर शाम से अटकलों के बीच आखिरकार सीएम योगी की सिफारिश पर राज्यपाल रामनाइक ने सोमवार को मुहर लगा ही दी। साथ ही ओमप्रकाश राजभर से उनका मंत्री पद छीन लिया गया। पढ़ें आगे की स्लाइड्स में...
ओम प्रकाश राजभर को दो महीने पहले ही मिल गई थी बर्खास्तगी की आहट, ये थी वजह
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प्रदेश सरकार के सहयोगी दल सुभासपा के अध्यक्ष और योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने चुनाव से पहले ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए थे। लेकिन चुनाव के मद्देनजर सरकार मंत्री ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ कोई भी कदम उठाना मुनासिब नहीं समझ रही थी। क्योंकि इससे जनता में एक गलत संदेश जाता। लेकिन अंदरखाने इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि कभी भी मंत्रीपद से ओमप्रकाश को हाथ धोना पड़ सकता है।
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ओम प्रकाश राजभर ने अपने मंच से भाजपा पर जुबानी हमला करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा। इसके बाद शुरू हुआ लोकसभा चुनाव का दौर और इसमें भाजपा को लोकसभा चुनाव में जितनी मुश्किल विपक्ष से नहीं हुई, उससे ज्यादा टीस सुभासपा अध्यक्ष और योगी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दी है। लोकसभा चुनाव में राजभर ने पूर्वांचल की पांच सीटें मांगी लेकिन भाजपा ने लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं दी।
भाजपा ने औम प्रकाश राजभर की पसंदीदा सीट घोसी देने की पेशकश जरूर की लेकिन शर्त यह थी कि वह भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे। यह शर्त ठुकरा कर राजभर ने चुनावी मैदान में ताल ठोंक दी और फिर पांचवें, छठे और सातवें चरण में 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। इनमें 22 सीटों पर सुभासपा उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए और राजभर ने अपने हर उम्मीदवार के मंच पर प्रचार के दौरान भाजपा पर जमकर वार किया।