फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

समुद्र मंथन से निकला कल्पवृक्ष काशी में धराशाई, पूरी होती थी हर मनोकामना

Mon, 20 Feb 2017 05:11 AM IST
रामजी श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
रामजी श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 20 Feb 2017 05:11 AM IST
विज्ञापन
Kalpavriksha dashed out of in Kashi, wishes were fulfilled
kalpavriksha tree - फोटो : अमर उजाला

धर्म, कर्म में आस्‍था रखने वाले लोगों के लिए आज काशी से एक बुरी खबर आई। हर मनोकामना पूरी करने वाला कल्पवृक्ष धराशाई हो गया। पर्यटन विभाग के काफी प्रयासों के बावजूद इसे बचाया नहीं जा सका। आगे की स्लाइड में जाने कल्पवृक्ष की खासियत-

Kalpavriksha dashed out of in Kashi, wishes were fulfilled
kalpavriksha tree - फोटो : अमर उजाला

वाराणसी के कैंटोंमेंट स्थित भीष्मचंडी मंदिर के पास स्थित कल्पवृक्ष शुक्रवार को धराशाई हो गया। भीष्मचंडी मंदिर के महंत मंगला प्रसाद चौबे ने बताया कि यह वृक्ष करीब 500 साल पुराना था। उन्होंने बताया कि कल्पवृक्ष स्वर्ग का एक विशेष वृक्ष है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह माना जाता है कि इस वृक्ष के नीचे बैठकर व्यक्ति जो भी इच्छा करता है, वह पूर्ण हो जाता है।

Kalpavriksha dashed out of in Kashi, wishes were fulfilled
kalpavriksha tree - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने बताया कि पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से कल्पवृक्ष भी एक था। कल्पवृक्ष निकलने के बाद देवता और असुर दोनों इसे लेना चाहते थे। इसी बीच ऋषि मुनियों ने इसे पृथ्वी वासियों के कल्याण के लिए देने की मांग की। विवाद को बढ़ता देख भगवान विष्‍णु ने कहा कि यह वृक्ष बैकुंठ धाम में रहेगा लेकिन इसके बीज पृथ्वी पर गिरेंगे। महंत जी ने बताया कि इन बीजों से पृथ्वी पर कल्पवृक्ष पैदा हुए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Kalpavriksha dashed out of in Kashi, wishes were fulfilled
kalpavriksha tree - फोटो : अमर उजाला

कल्पवृक्ष को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जैसे कल्पद्रुप, कल्पतरु, सुरतरु देवतरु और कल्पलता। कल्पवृक्ष के विषय में कहा जाता है कि इसका नाश कल्प के अंत तक नहीं होता है। यह वृक्ष लगभग 70 फुट ऊंचा होता है और इसके तने का व्यास 35 फुट तक हो सकता है। इस वृक्ष की औसत जीवन अवधि 2500-3000 साल है। कार्बन डेटिंग के जरिए सबसे पुराने फर्स्ट टाइमर की उम्र 6,000 साल आंकी गई है।

विज्ञापन
Kalpavriksha dashed out of in Kashi, wishes were fulfilled
kalpavriksha tree - फोटो : अमर उजाला

यह दवा देने वाला वृक्ष है। इसमें संतरे से छह गुना ज्यादा विटामिन 'सी' होता है। वहीं गाय के दूध से दोगुना कैल्शियम होता है । इसमें सभी तरह के विटामिन भी पाए जाते हैं। पौराणिक मान्यता और औषधीय गुणों के कारण कल्पवृक्ष की पूजा की जाती है। महंत जी ने बताया कि भारत में रांची, अल्मोड़ा, काशी, नर्मदा किनारे, कर्नाटक आदि कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर ही यह वृक्ष पाया जाता है। पद्मपुराण के अनुसार परिजात ही कल्पवृक्ष है। यह वृक्ष बाराबंकी के बोरोलिया में आज भी विद्यमान है। कार्बन डेटिंग से वैज्ञानिकों ने इसकी उम्र 5,000 वर्ष से भी अधिक की बताई है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed