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स्वतंत्रता दिवस विशेष: गाजीपुर के इस योद्धा का नाम सुन कर भाग जाते थे फिरंगी 

Wed, 15 Aug 2018 10:16 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर Updated Wed, 15 Aug 2018 10:16 AM IST
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Independence day special britishers were afraid ghazipur freedom fighter
ghazipur - फोटो : अमर उजाला
यूपी के साथ ही बिहार के लोगों को भी एकजुट कर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गहमर गांव के सपूत मैगर सिंह ने कई वर्षों तक जमकर लड़ाई लड़ी। आजादी के इस दीवाने की उस दौरान इतनी दहशत थी कि इनका नाम सुनकर अंग्रेज अपनी कुर्सी छोड़ कर भाग जाते थे। 1857 की क्रांति के इस महानायक को गाजीपुर में पीपल के पेड़ से लटका कर सरेआम फांसी दे दी गई। आगे की स्लाइड्स में देखें...
Independence day special britishers were afraid ghazipur freedom fighter
ghazipur - फोटो : अमर उजाला
गहमर गांव के सपूत वीर मैगर सिंह का नाम इतिहास में काफी गर्व से लिया जाता है। गहमर के किसान भंजन सिंह तथा धनेशा के घर 1820 में जन्मे मैगर सिंह शुरू से ही अभिमानी थे। देश की आजादी का जुनून इनके सिर चढ़ कर बोल रहा था। अंग्रेज इन्हें फूटी आंख भी नहीं सुहाते। उन दिनों नील की फैक्ट्री गहमर, भदौरा, दिलदारनगर में स्थापित थी। गहमर नील फैक्ट्री को राबर्ट स्मिथ चलाता था। उसके उत्पीड़न से आसपास के लोग परेशान थे। क्रांति के बाद जगह-जगह छिटपुट विरोध भी शुरू हो गया था। इसी बीच बिहार राज्य के चौसा के पास राजपुर गांव में नील फैक्ट्री के मालिक की हत्या कर दी गई। 
Independence day special britishers were afraid ghazipur freedom fighter
ghazipur - फोटो : अमर उजाला
मैगर सिंह के नेतृत्व में लगभग तीन सौ विद्रोहियों ने राबर्ट स्मिथ के खिलाफ बागी अभियान छेड़ने का फैसला कर लिया। तीन जून 1857 को उनका दल गहमर पहुंचा। इसके पूर्व ही दहशत के चलते राबर्ट स्मिथ भाग कर बिहार के बक्सर चला गया। सितंबर 1858 अंग्रेजी सेना के दबाव के चलते मैगर सिंह अपने को असुरक्षित महसूस करने लगे। बाद में वह नेपाल चले गए। अब मैगर सिंह के खिलाफ अंग्रेजी हुकूमत आ गई। उन्हें पकड़ने या पकड़वाने के लिए छह हजार का इनाम घोषित हुआ। उनके दोनों पुत्रों भिरगुन और संग्राम सिंह को अंग्रेजों ने अपने कब्जे में लेकर मार डाला। 
 
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Independence day special britishers were afraid ghazipur freedom fighter
independence day
देश वापसी के बाद 27 नवंबर 1860 में उन्होंने बनारस के स्पेशल जज की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। मैगर सिंह सिंह को माफ नहीं किया गया। उनको गाजीपुर जेल में पीपल के पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गई थी। यह जेल उस समय महुआबाग में था पीपल का पेड़ अभी भी है। उनके बलिदान की गाथा अमिट है। ग्राम पंचायत के परिसर में 16 जनवरी 1961 को तत्कालीन रेल मंत्री जगजीवन राम ने एक स्मारक का उद्घाटन किया। इनके नाम पर गहमर गांव में पट्टी (टोला) भी है। गांव के पूरब तरफ क्रीड़ा स्थल पर तत्कालीन विधायक सिंहासन सिंह ने एक आदमकद प्रतिमा लगवाई। 
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