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तस्वीरें: मणिकर्णिका घाट पर नाव से ले जा रहे शव, 566 परिवारों ने छोड़ा घर; खतरे के निशान के करीब पहुंचीं गंगा

Fri, 04 Sep 2026 02:31 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 04 Sep 2026 02:31 PM IST
सार

वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। उधर, वरुणा नदी भी उफान पर है। ऐसे में लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। सबसे ज्यादा परेशानी मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर दाह संस्कार करने में हो रही है। शवों को शमशान तक पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।

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Impact of floods in Varanasi bodies transported by boat at Manikarnika Ghat 566 families have left their homes
वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

गंगा का जलस्तर दिन पर दिन बढ़ता ही जा रहा है। गंगा खतरे के निशान को छूने को आतुर हैं। बृहस्पतिवार को जलस्तर बढ़ कर 70.68 मीटर दर्ज किया गया। अब जलस्तर खतरे के निशान से महज 0.58 मीटर ही नीचे है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार जलस्तर में पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है। गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर ने तटवर्ती इलाकों में रहने वालों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

Impact of floods in Varanasi bodies transported by boat at Manikarnika Ghat 566 families have left their homes
वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

अब तक 566 परिवारों और 1381 लोग अपने घरों को छोड़ शेल्टर होम में शिफ्ट हो गए हैं। इनके अलावा 3843 लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों या किराये के मकान में शिफ्ट हैं। बाढ़ के कारण शवों को मणिकर्णिका घाट तक लाना भी दुश्वार हो गया है। शमशान तक पहुंचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। शवयात्री को गंदगी, कीचड़, मलबे और कंधे तक पानी से गुजरना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह हो रहा है।

Impact of floods in Varanasi bodies transported by boat at Manikarnika Ghat 566 families have left their homes
वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

गंगा के बढ़ते जलस्तर से एसटीपी के बंद होने का बढ़ा खतरा
गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही एसटीपी के बंद होने का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान में बाढ़ में एसटीपी संचालन धीमी गति से हो रहा है। बाढ़ के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का संचालन अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। जलस्तर खतरे का निशान पार होने के बाद बैकफ्लो (उल्टा बहाव) होने लगता है। इससे अधिकांश निचले इलाकों में स्थित एसटीपी को बंद करना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, सीवर में भारी मात्रा में बारिश का पानी और गाद घुसने से प्लांट के ओवरलोड होने का खतरा रहता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एके सिंह ने बताया कि सभी एसटीपी काम कर रहे हैं। अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है। खतरे का निशान पार होने पर दिक्कत बढ़ सकती है। 

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वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

रामेश्वर मठ में आधा फीट घुसा बाढ़ का पानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नगवा नाला में पानी बढ़ने के बाद पानी रामेश्वर मठ में प्रवेश कर गया। बृहस्पतिवार भोर में मठ के भीतर पानी घुस गया। करीब आधा फीट पानी मठ के निचले तल में लग गया है। मठ में रहकर पढ़ने वाले छात्रों को रामेश्वर मठ से दूसरे जगह शिफ्ट कर दिया गया। आधा फीट पानी और बढ़ा तो नगवा हरिजन बस्ती सोनकर बस्ती में और नाले के किनारे बने घरों में पानी घुस जाएगा। वहीं, सीर गोवर्धनपुर वार्ड में मारुति नगर कॉलोनी में पानी का दबाव बढ़ने से गुलाब लाॅज के पास नाला भर गया। नाला भरने के बाद 24 के करीब मकान के अगल-बगल एक से दो फीट पानी भर गया है। काॅलोनी में पानी भरने के बाद बिजली सप्लाई बंद होने से लोग परेशान हैं। 

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वाराणसी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला

पिपरी गांव के राजभर बस्ती से पलायन शुरू
नाद नदी व गोमती नदी के बीच बसा पिपरी गांव चारों तरफ बाढ़ के पानी से घिर गया है। मठिया गांव से पिपरी, धौरहरा से बेला मार्ग पर पानी भर जाने से कई गांवों का संपर्क टूट गया है। बृहस्पतिवार को दो नावों से राजभर बस्ती के लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। यहां के लोग हरिहरपुर गांव पहुंच रहे हैं। वहीं, चिरईगांव के रामपुर की दलित बस्ती में छह परिवारों ने रामपुर प्राथमिक विद्यालय में राहत शिविर में शरण ली। 

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