पौष माह शुक्लपक्ष चतुर्दशी तिथि को बालाघाट स्थित मां मंगला गौरी मंदिर छोड़कर छह घंटे नगर भ्रमण पर निकलीं। डमरुओं के निनाद और भक्तों के जयघोष के बीच पालकी पर ठाट-बाट से विराजीं मां मंगला गौरी भक्तों पर आशीष बरसा रही थीं। 251 महिलाएं सिर पर मंगल कलश लेकर चल रही थीं।
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आरती के बाद शुरू हुई शोभायात्रा।
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मां मंगला गौरी के अन्नकूट महोत्सव पर मां मंगला गभस्तीश्वर सेवा समिति के बैनर तले मां मंगला गौरी का विविध अनुष्ठान हुआ। मंदिर के महंत पं. नारायण गुरु के आचार्यत्व में सुबह मंदिर में मां को पंचामृत स्नान कराकर उन्हें नवीन वस्त्र और आभूषण धारण कराया गया।
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मां मंगला गाैरी की हुई विशेष पूजा।
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गुलाब, बेला, कुंद, गुड़हल, गेंदे सहित 15 तरह के फूलों से मां का शृंगार हुआ। 10 क्विंटल विविध मिष्ठान और पकवान से मां को 56 भोग लगा। सुबह नौ बजे मां को पालकी में बैठाया गया। भक्त गंगाजल लेकर टाउनहाॅल पहुंचे, जहां पराड़कर स्मृति भवन में 151 कन्याओं का विधिवत पूजन के बाद गाजेबाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
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पालकी को कंधा देते मां के भक्त।
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आगे महिलाएं मां के जयकारा लगाते हुए कलश लेकर चल रही थीं। पालकी लिए श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते चल रहे थे। मार्ग में महिलाएं मां का पूजन कर आरती उतारकर सुख-समृद्धि की कामना कर रही थीं। शोभायात्रा बुलानाला, ठठेरी, आसभैरव, ठठेरी बाजार, चौखंभा, राज मंदिर, ब्रह्माघाट, दुग्धविनायक होते हुए दोपहर में तीन बजे मंगला गौरी मंदिर पहुंची, जहां मां की आरती उतारी गई। इसके साथ ही मंदिर में दर्शन-पूजन का क्रम शुरू हुआ।
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शोभायात्रा में शामिल महिलाएं।
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संध्याकाल में दुर्गा सप्तशती पाठ से हवन पूजन हुआ। इस दौरान संस्था की ओर से विशिष्टजनों का सम्मान हुआ। भंडारे में हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। पं. नारायण गुरु ने बताया कि मां अन्नपूर्णा और पार्वती की स्वरूप मां मंगला गौरी आज ही के दिन मंदिर छोड़कर नगर भ्रमण पर निकलती हैं। मां के दर्शन-पूजन करने वालों पर अन्न-धन, सौभाग्य व संतान की कृपा बरसती हैं। शोभायात्रा में समिति के अध्यक्ष नरेंद्र पांडेय, दीपक पांडेय, वरुण पांडेय, सौरभ, अजय शर्मा, नरेंद्र पांडेय, अशोक नेने आदि शामिल रहे।