बनारस का नाम आते ही गंगा घाटों की आकृतियां अपने आप मन मस्तिष्क व जेहन में बनने लगती हैं। कहा जाता है कि बनारस और गंगा घाट एक दूसरे के बिन जैसे अधूरे। कोरोना में गंगा घाटों पर सैलानियों की आवाजाही थमी हुई है। सुबह व शाम घाटों की सैर करने वाले शहरवासियों ने भी घाटों से दूरी बना ली है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस मंच पर अब न तो भक्ति भजन होती है और न ही उस उल्लास के साथ अब आरती व हवन पूजन। सुबह-ए-बनारस मंच पर बीएचयू के संगीत शिक्षकों और संगीत की छात्र-छात्राएं भी अब अपनी सुर, लय और ताल का जादू नहीं बिखेर पा रही हैं। सब कुछ थम सा गया है। देखें अगली स्लाइड्स...
तस्वीरें: बनारस के इस घाट पर कभी सैर करने आते थे लोग, होती थी आरती, अब बच्चे मार रहे हैं चौक्का-छक्का
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Tue, 11 May 2021 10:13 AM IST
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