सावन के पहले सोमवार को गंगधार से बाबा दरबार एकाकार नजर आया। महामारी काल में श्रद्धा, आस्था व उमंग की हिलोरें के साथ भक्तिभाव से श्रद्धालुओं ने आदि विश्वेश्वर का जलाभिषेक किया। मंगला आरती से शुरू हुआ दर्शन पूजन व जलाभिषेक का सिलसिला शयन आरती तक अनवरत चलता रहा। बाबा का दरबार हर-हर, बम-बम के जयघोष से गूंजता रहा। जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को शाम से ही बाबा के दर्शन करने के लिए कतारें लगना शुरू हो गई थी। सभी शिवभक्त मंगला आरती की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिससे उनके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर के कपाट खुलें और जिलाभिषेक कर दर्शन करें। मंगला आरती होते ही श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। कोरोना महामारी को ध्यान रखते हुए मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की है। भक्त न तो काशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पा रहे हैं और न ही स्पर्श दर्शन करने की इजाजत है। बाबा का जलाभिषेक भी गर्भगृह के बाहर लगे अरघे से ही किया जा रहा है। भक्तों को श्री काशी विश्वनाथ का झांकी दर्शन ही मिल रहा है। प्रशासन ने सड़क पर बैरिकेडिंग लगाई है, जहां भक्त कतारबद्ध लगे हुए हैं। शिवभक्तों के जयकारे से मंदिर के आसपास का क्षेत्र गुलजार हो उठा है। देखें अगली स्लाइड्स...।
सावन का पहला सोमवार: हर-हर महादेव से गूंजा काशी विश्वनाथ परिसर, यादव बंधुओं ने किया जलाभिषेक, भक्तों का उमड़ा सैलाब
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सावन के पहले सोमवार को यादव बंधुओं ने 89 साल से चली आ रही बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक की परंपरा का निर्वहन किया। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए घड़ों में जल लेकर यादव बंधुओं ने हर-हर महादेव का जयघोष करते हुए जलाभिषेक किया। बाबा विश्वनाथ से यादव बंधुओं से कोरोना मुक्ति की गुहार भी लगाई।
सोमवार को चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के तत्वावधान में शालिनी यादव के नेतृत्व में बाबा काशी विश्वनाथ का जलाभिषेक हुआ।
सावन को देखते हुए विशेष तैयारी
सावन के पहले सोमवार पर दर्शन के लिए रात से कतार में लगे शिव भक्तमंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि सावन को देखते हुए विशेष तैयारी की गई है। मंदिर में गर्भगृह के पहले ही श्रद्धालु बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन एलईडी स्क्रीन पर कर कर रहे हैं। सभी रास्तों पर पेयजल की व्यवस्था भी की गई है। स्टील की रेलिंग के बीच बिछे रेड कारपेट से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं। आने वाले श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम का स्वरूप भी देखने को मिल रहा है।
बनाए गए हैं चार गेट
विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए एबीसीडी नाम से चार गेट बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार छत्ताद्वार होते हुए मंदिर चौक भेजा जा रहा है। श्रद्धालुओं को गेट-ए से प्रवेश करने के बाद गर्भगृह के पूर्वी प्रवेश द्वार पर जल चढ़ाने की व्यवस्था की गई है। बांसफाटक से ढुंढिराज गली होकर आने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर के गेट-डी से प्रवेश दिया जा रहा है और गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से दर्शन व जलाभिषेक कर कर रहे हैं। सरस्वती फाटक की ओर से आने वाले श्रद्धालु गर्भगृह के दक्षिणी द्वार और वीआईपी, वीवीआईपी व सुगम दर्शन के टिकटधारी गेट-सी से प्रवेश कर गर्भगृह के उत्तरी द्वार से दर्शन कर रहे हैं।
सावन में बाबा विश्वनाथ के पांच स्वरूपों के होते हैं दर्शन
देवाधिदेव महादेव हर स्वरूप में अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। भूतभावन महादेव काशी में आदिविश्वेश्वर स्वरूप में विराजते हैं। भगवान शिव का यह राजराजेश्वर स्वरूप भक्तों के लिए सर्व फलदायी है। भगवान शिव की भक्ति को समर्पित यह महीना भी शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। महादेव भी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को विविध स्वरूपों में दर्शन देते हैं। सावन के पहले सोमवार को गंगाधर अपने शिव स्वरूप में शिवभक्तों को दर्शन देकर कृतार्थ करेंगे।