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कर्णम मल्लेश्वरी को टीवी में देख एक पिता ने संजोया था सपना, आज उनकी बेटी ने सपने को सच कर दिया

Fri, 13 Apr 2018 11:39 AM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Fri, 13 Apr 2018 11:39 AM IST
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Commonwealth games 2018 Gold medalist weightlighter poonam yadav due to karnam malleswari
pooanm yadav - फोटो : twitter
वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में कांस्य पदक जीता था तो बनारस के एक किसान ने उसी दिन ये सोचा था कि मैं अपनी बेटी को ऐसा ही बनाउंगा। बेटी ने पिता के इस सपने को तमाम संर्घषों के बाद भी सच कर दिया। बेटी का नाम है पूनम यादव जिसने गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेल में वेटलिफ्टिंग का गोल्ड मेडल जीता है। 2014 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल में पूनम ने कांस्य पदक जीता था। इस जीत के पीछे पूनम और उसके परिवार ने कई संघर्ष किए हैं। पूनम ने गोल्ड मेडल जीतकर न केवल देश का मान बढ़ाया, बल्कि अपने मां-बाप के उस सपने को भी पूरा किया, जो उन्होंने मुफलिसी के दौर में कभी खुली आंखों से देखे थे। आगे की स्लाइड्स में देखें..



 
Commonwealth games 2018 Gold medalist weightlighter poonam yadav due to karnam malleswari
pooanm yadav - फोटो : self
वाराणसी के दांदूपुर गांव निवासी किसान की बेटी पूनम पांच बहन और दो भाइयों में चौथे पर नंबर है। उसके अचानक से साधारण लड़की से स्पोर्ट्स वूमेन बनने की कहानी काफी रोचक है। पूनम की मां उर्मिला ने बताया कि उसके पिता कैलाश ने कर्णम मल्लेश्वरी का खेल देख कर बेटी को वेटलिफ्टर बनाया। 2011 में बड़ी बहनों को देखकर पूनम ने अभ्यास करना शुरू किया। पूनम की बड़ी बहनें भी वेटलिफ्टर हैं। जब पूनम मैदान पर जाती थी तो लोग ताना मारते थे। मगर उन्होंने इसपर ध्यान नहीं दिया। 

 
Commonwealth games 2018 Gold medalist weightlighter poonam yadav due to karnam malleswari
pooanm - फोटो : अमर उजाला
बनारस में आज सबकी जुबां पर बस एक ही नाम है। और वो है पूनम यादव का नाम।  मां उर्मिला जहां आज बेटी पूनम की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रही है, वहीं बीते दिनों को याद नहीं करना चाहती। संघर्ष की बात पूछते ही उन्होंने भरे गले से कहा कि उन दिनों के बारे में अब मत पूछिए क्योंकि वह दौर हम सब भूलना चाहते हैं। बेटी घर में कुछ अलग करना चाहती थी, लेकिन गरीबी और मुफलिसी की वजह से हम सब उसकी मदद नहीं कर पा रहे थे।

 
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Commonwealth games 2018 Gold medalist weightlighter poonam yadav due to karnam malleswari
pooanm - फोटो : अमर उजाला
हालात ऐसे थे कि मैदान में अभ्यास करने के बाद पूनम को घर आकर भूखे पेट सोना पड़ता था। इन सब वजहों से एक बार तो टूटने लगी थी, लेकिन घर वालों ने उसे हिम्मत दी और इसी हिम्मत का नतीजा है कि आज उनकी बेटी एक के बाद एक उपलब्धि हासिल कर परिवार, बनारस और देश का नाम रोशन कर रही है। वहीं पूनम की दादी संदेयी अपनी पोती को इस ऊंचाई पर देखकर बेहद खुश हैं। उनका कहना था कि जब एक बार पूनम को वजन उठाते देखा, तो खूब रोई। डर लगता था कि इतना भारी लोहा कैसे उठाती है। 
 
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Commonwealth games 2018 Gold medalist weightlighter poonam yadav due to karnam malleswari
poonam yadav - फोटो : अमर उजाला

इस उपलब्धि से पूनम के परिजन बेहद खुश हैं। वजह आज पूनम जिस मुकाम पर है, शायद उसकी कल्पना भी परिवार में किसी ने नहीं की थी। पिता कैलाश यादव मामूली किसान हैं और पूनम अब रेलवे में टीटीई है। मां का सपना था कि बेटी इस बार गोल्ड लाए और वो पूरा हो गया। पूनम की मां का कहना है कि बिटिया ने जब से खेलना शुरु किया है, तो घर का हर कमरा मेडल, शील्ड और सर्टिफिकेट से भरा हुआ है। बस कमी थी तो गोल्ड की, जो उनकी बेटी ने आज जीतकर पूरा कर दिया।
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