गंगा तट पर शनिवार की रात पार्श्व गायक सुरेश वाडेकर के सुरों की खनक गूंजी। सिने अभिनेता अन्नू कपूर ने भी दर्शकों-श्रोताओं को बांधे रखा। ड्रम, तबला, बांसुरी और पखावज के फ्यूजन का भी कोई जोड़ नहीं था।
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- फोटो : अमर उजाला
सिम्फनी में जहां युवा कलाकारों ने समां बांधा वहीं, भरतनाट्यम पर दीप नृत्य की प्रस्तुति पर संगीत प्रेमी झूम उठे। रंग-बिरंगी छटा के बीच सुसज्जित मंच पर सुर गंगा संगीत महोत्सव की दूसरी निशा परवान चढ़ी।
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सुरेश वाडेकर के मंच संभालते ही हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। मेघा रे मेघा रे..., सपनों में मिलती है कुड़ी... की जब उन्होंने प्रस्तुति की तब दर्शक दीर्घा में युवाओं की भीड़ तालियों की बौछार के साथ झूम उठी।
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इसके बाद चप्पा-चप्पा चरखा चले... सुनाया। उन्होंने ‘और इस दिल में क्या रखा है, तेरा ही दर्द छिपा रखा है...’ जैसे फिल्मी नगमों की प्रस्तुति से खूब वाहवाही बटोरी। इससे पहले मुंबई के प्रख्यात कलाकार पं. संजय विद्यार्थी के निर्देशन में काशी के कलाकारों ने सिंफनी की मोहक प्रस्तुति दी।
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विभिन्न विधाओं के लगभग 70 कलाकारों के समूह ने अपनी प्रस्तुति से चार चांद लगाए। सबसे पहले राग जोग में तीन ताल में निबद्ध बंदिश- साजन मोरे घर आए... की प्रस्तुति की। गायन पर पं. गणेश प्रसाद मिश्र, डॉ. रामशंकर, विदिशा हाजरा ने साथ दिया।