बलिया के थाना रेवती के गायघाट का दस वर्ष पूर्व गुम हुआ रामकुमार के अचानक मंगलवार को अपराह्न अपने घर पहुंचते ही परिवार और गांव में खुशी की लहर दौड़ गई । बुधन अपने बेटे रामकुमार को छाती में लगा कर जहां रोने लगे वहीं बालक को पहुंचाने वाले प्रो. उदय कुमार की आंखों में भावुकता के आंसू छलक पड़े।
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फेसबुक की मदद से दस साल बाद पहुंचा घर, छलक आए आंसू
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
Updated Fri, 21 Apr 2017 02:14 PM IST
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माता-पिता के साथ रामकुमार
- फोटो : अमर उजाला
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बुधन का दूसरा बेटा राम कुमार अपनी मां सावित्री, दादी सुकरी एवं चाची तेतरी देवी के साथ छ: वर्ष की उम्र में 2006 में खेत की सोहनी को दाह रेवती के किनारे गया हुआ था। वहां से किसी प्रकार यह बच्चा बहक गया।
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इधर-उधर भटकते हुए कुछ महीनों बाद राम कुमार गया जिला के बेलागंज निवासी प्रो. उदय कुमार के भतीजे को रंजन को रेलवे प्लेटफार्म पर लावारिस हालत में मिला था। घर आने के बाद काफी खोजबीन के बाद जब राम कुमार के माता पिता का पता नहीं लग पाया तो उदय कुमार ने बालक को अपने परिवार में ही रख लिया।
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प्रो. कुमार ने बताया कि इस बालक को बलिया व रेवती के अलावे कुछ नही याद था। बताया कि राम कुमार ने स्वयं फेसबुक पर सर्च किया तथा सर्च में रेवती निवासी पत्रकार सिंधु तिवारी का मोबाइल नंबर मिल गया।
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उस नंबर के जरिए सिंधु तिवारी से संपर्क कर आज इसके परिवार तक पहुंचे पाए हैं। मगध विश्वविद्यालय के श्रम एवं समाज कल्याण के प्रोफ़ेसर उदय कुमार दस वर्ष पूर्व गुम हुए बालक राम कुमार को कार से लेकर दो बजे दिन में उसके पैतृक आवास पहुंचे तो परिवारी लोग भावुक होकर रो पड़े।